भारतकोश
संग्रह पर लौटें

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

ग्रहों का दृष्टिविचार : ४३

ग्रहों की दृष्टि

दृष्टि प्रकार भाव पर दृष्टिकला विश्वा फल

१ पाव दृष्टिज्डे ६-११ १५ ५ सुख, लाभ, स्नेह और बुद्धि बढ़ाने वाली ।.

अद्धं ,, सडे ४-१० ३० १९ गुप्तादि भेददृष्टि,मित्रों में भेद करे,विवाद

पौन , स्ट ५-९ ४५ १५ बढ़ावे, धन लाभ, सुख तथा निरंतर मित्रों

पूर्ण , =१ ७ ६० २० की वृद्धि करे, सदा अरिष्टकारक है, वुद्धि

विवाद और शत्रु वृद्धि करे ।

नीलकंठ मत से दृष्टि

दृष्टि प्रकार भाव पर दृष्टि कला नाम फल

१ पादोन (पौन) ५-९ ४५” प्रत्यक्ष स्नेहा परस्पर प्रीत, सुख, धन

सम्पत्ति देवे, कार्य सिद्ध करे ।

२ तृतीयांशेन ३-११ ४०” गुप्त स्नेहा स्नेह बढ़ाने वाली, सिद्धि करे

धन, सुख आदि देवे ।

३ चतुर्था ४-१० १५ गाप्तबैरा

४ पूर्णकला ७ ६० प्रत्यक्ष वैरा कार्य नाश अनिष्ट फल कलह हो ।

४ एक स्थान में ग्रह १ ० अत्यंत बैरा

उपरोक्त दृष्टि का फल

(१) यह बलवान दृष्टि है। मिलाप इसका नाम है। परस्पर प्रीत देती है स्वजनों

आदि को सुख, धन, सम्पत्ति आदि देती है। यह भाव जन्य सम्पूर्ण कायं साधन

करती है।

(२) यह षड भाग १०-० दृष्टि होती है । सर्वत्र कायं सिद्ध करने वाली है।

यह स्नेह बढ़ाने वाली है । पुत्र सुख धन और आयु देती है । ३-४-५ तीनों

दृष्टि क्षुत संज्ञक हैं । अनिष्ट फल देती हैं । कार्य नाश करती हैं । संग्राम फल आदि

क्लेश देती है।

ग्रह दृष्टि फल

पाप प्रहों पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो और शुभ ग्रहों की शुभ ग्रह पर दृष्टि हों

तो यथोक्त फल देते हैं । इसके विपरीत आधा फल देते हैं। भाव अपने स्वामी या

गुरु वुध शुक्र से युक्त हो और ये ग्रह उस भाव को देखते हों तो वह भाव पूर्ण फल

देता है । अन्य ग्रहों से युक्त या दृष्ट से उतना फल नहीं देते ।

ताजिकोक्त दृष्टि साधन

जातक में बताये दृष्टि साधन से ताजिक में भिन्न प्रकार का दृष्टि साधन

नीलकंठ ने बताया है ।

द्रष्टाग्रह-जों देखता है जिसकी दृष्टि जाननी है । ( दृश्य-दृष्ट )-ऐोप अंक

दृश्य-जिसे देखता है । जिस पर दृष्टि है ।

४४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफल खण्ड

दोष राशि १ २ ३ ४ ५ ६ ७ ८ ९ १० ११ १२ राशि

ध्रुवांक ० ४० १५ ४५० ६०० ४५१५१० ० ६० केला

जैसे शेष राशि १, ५, ७, ११ रहे तो दृष्टि ° होगी । शेष २ रहे तो ४० कला

३, ९, में १५”, ४-८ में ४५' और ६-१२ अन्तर में ६० पूर्ण दृष्टि होती है ।

दृष्टि साधन का प्रयोजन

ग्रहों की दृष्टि दीप्तांदा के भीतर हो अर्थात्‌ लगभग १२" के भीतर हो तो दृष्टि

का फल होगा दीप्तांश के उपरांत पूरा फल नहीं होता। इस कारण गणित द्वारा

दृष्टि साधन करना पड़ता है ।

ग्रहों के दीप्तांश

ग्रह सूर्यं चंद्र मंगल वुध गुर शुक्र शनि ग्रह

दीप्तांश १५ १२ द ७ ९ ७ ९ अंश

द्रष्टा और दृश्य ग्रह अपने-अपने दीप्तांश के भीतर अपना दृष्टि फल यथोक्त

देते हैं । ग्रह अपने दीप्तांश से अधिक हो तो इत्थशाल तथा सम्बन्ध योगादि का शुभा-

शुभ यथोक्त फल नहीं देते । अर्थात्‌ नवम पंचम आदि दुष्ट हो आगे पीछे दीप्तांश

के भीतर ग्रह हो तो नवम आदि दृष्टि का श्रेष्ठ फल देता है। यदि दीप्तांश

को उल्लंघन कर जावे तो साधारण दृष्टि फल को देगा। इस प्रकार दीप्तांश का

अवदय विचार करना चाहिए । षोडश विशेष योगों में यह विचारणीय है ।

दृष्टि साधन की रीति

(दृश्य-द्रष्टा)-शेष राशि अंश आदि

शेष राशि>उपरोक्त घटाने से जो राशि प्राप्त हुई ।

शेप अंशादि-उपरोक्‍त घटाने से प्राप्त राशि अंश आदि में से राशि को छोड़

कर केवल अंशादि ।

धरुरांक की दृष्टि से इस प्रकार सम्बन्ध है

त्रिपाद दृष्टि<४५/, त्र्यंश (३)-४०', षष्ठ्यंशा=१९', पैदल (एक पाद दृष्टि)= 4४, पूर्ण दृष्टि-६०/, शुन्य दृष्टि=०' पिछला ध्र.व-गत । वर्तमान धरुवऱ[प्राप्त-शेष राशि से प्राप्त ध्रुवांक उपरोक्त

चक्रानुसार । आगे का ध्रुव-ऐक्य, अग्रिम धुवऱ्प्ाप्त ध्रूव के १ राशि आगे का

घ्र.वांक । ॐ ध्रूबांतर=आगे का ध्रुवांक से बडा हो तो +(धन) छोटा हो तो-(ऋण)

(शेषांश > ध्रवांतर) = ३०>अनुपातिक ध्न बाँक ॐ उपरोक्त प्राप्त ध्रु बाँक ॐ अनुपातिक ध्रूवांक-दृष्टि कला विकला इसी को गणित की सरलता के लिए नीचे चक्र बना दिया है ।

दृष्टि साधन चक्र

शेष राशि २ ३ ¥ द ९ १० ६-१२ या? ७, वी (0. र अंश ,_ अंश गणित क्रिया ४०-ह अंश १९ + अंश, ४५-१३ अंश र A ऱ्ह

६०-(अंश > २)

ग्रहों की दृष्टिविचार : ४५

जैसे २ राशि बचा तो अंश में ५ का गुणा कर ६ का भाग देना जो आवे उसे

४० से घटाना । ३ बचा तो १५ में शेष अंशादि जोड़ देना । १-५-७-१३ शेष में

दृष्टि शून्य है ।

सूर्य की अन्य ग्रहों पर दृष्टि साधन करते हैं । सूय द्रष्टा हुआ ।

(१) दृश्य चन्द्र: ५-२५//-४९/-५” शेष राशि६=६० ध्रुवांक अन्तर ६० ऋण

द्रष्टा सूयं १- ५ -३३ -७ ऐण्य ७5० » (आगे का ध्रु' कम

91 RRR पतन होने से ऋण)

शेष अंशादि

२३-१५-५८ > ‰४ =४६-३१-५६ अनुपातिक ध्रुव ऋण

प्राप्त भ्रुव ६०¬ ०¬ ०

अनुपातिक ४६-३१-५६ =्दष्टि १३-२८”

शेष १३-२८- ४

(२) दूसरी रीति ६०-( अंश ५२) शेष अंशादि २३-१५-५८ २

६०-- ०-- ० +४६-३१--५६

४६--३१--१६ =दृष्टि १३-२८”

शेष १३-२८--४

इस प्रकार दृष्टि साधन की दोनों रीतियाँ देखने से प्रगट होगा कि दूसरी रीति

सरल है । उसी से दृष्टि साधन करना । वास्तव में दोनों रीतियाँ एक ही हैं परन्तु

दूसरी रीति सरल बना दी गई है।

लग्न पर पंचाधिकारिथों की दृष्टि साधन

पंचाधिकारियों की लग्न पर दृष्टि है या नहीं यह देखने को लग्न पर ताजिकोक्त

दृष्टि साधन करते हैं ।

(१) दृश्य लग्नर ७--२७९--३८/-३९” शेष ८=(४५-अंश) ४५-- ०- ०

द्रष्टा सूये=११-- ५ -३३-- ७ अंश २२- ५०-२२

शेष ८-२२ -- ५-३२. =दृष्टि २२-५४” शेष २२९४२८

(२) दृश्य लग्न =१-२७०--३८--३९” शेष १=्दृष्टि ०

द्रष्टा चन्द्र =५--२८ ““४९- ५

शेष =१--२३ ¬-४९ -३४

(३) दुश्य लग्न = ७-२७-५८३९ शेष शऱ्दूष्टि ०

द्रष्टा भंगल= २.-२३--१५¬ रे

शेष ५ ५२३-३६

४६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफल खण्ड

(४) दृश्य लगत = ७-२७-३८--३९

द्रष्टा वुध =११-१७- २-१९५

शेष

(५) दृश्य लग्न = ७-२७-३५-२९

द्रष्टा गुर ६- ५-४४-५२

हेष १-२१-४ ३-४७

(६) दृश्य लग्न = ७रा-२७९-३५-३९”

द्रष्टा शुक्र = ११-१७ -२६ -२४

शेष = ५-१०-२-५

९७) दृष्य लगत = ७-२७ -३८ -३९

द्रष्ट क्षति = २-२६ -१४ -*/७

शेष ५ १-२३ -५२

(८) दृश्य लग्न = ७-२७ -३८ -३९

८-१०--३६--९४ दृष्टि=२४-२३

शेष १-दृष्टिर०

शेष ८ राशि=( ४५-अंश ) ४२-- ०-- ०

अंश-१०--३६--२४

शेष=३४--२३--३६

शेष ८=(४५-अंश) ४५'- ०- ०

अंश=१० - २- ५

दृष्टि=३४-५७” ३४-५७-५४ शेष ५ राशि दृष्टि=०

शेष ५ राशि दृष्टि ०

द्रष्टा राहू = २- २-१४ -४५

रोष ९५-२५ -२३ -५४

लघु पंचाधिकारी की लग्न पर दृष्टि विचार

लघु पंचाधिकारी बुध मंगळ शुक्र शनि हैं इनमें से मंगल और शनि की लग्न पर

दृष्टि नहीं है । केवल बुध और शुक्र की दृष्टि है।

बुध की दृष्टि २४-२१” और शुक्र की ३४-५७” है ।

अध्याय ६

वृहृत्पंचवगी बल साधन

ग्रहों का बल जानने को पंचवर्गी वल निकालना पड़ता है। यह ५ प्रकार के बल के योग से बना है। (१) ग्रह स्वामी, (२) उच्च बल, (३) हद्दा स्वामी (४) द्रेष्काण स्वामी, (५) नवांश स्वामी ।

९१) गृह स्वामी

वर्ष कुंडली में देखना कौन-कौन ग्रह स्वस्थानी हैं, ये किस ग्रह के स्थान में हैं । ग्रहों के स्व स्थान नीचे दिये हैं । यही ग्रहों के ग्रह हैं । जैसे वर्ष कुण्डली में सूर्य बुध शुक्र मीन के हैं जिनका स्वामी गुरु है तो ये ग्रह गुरु के घर में हुए । चन्द्र कन्या का है मंगल शनि मिथुन के हैं जिनका स्वामी बुध है तो ये ग्रह बुध के घर में हुए । गुरु तुळा का है जिसका स्वामी शुक्र है तो गुरु शुक्र के घर में हुआ।

वृहत्पंचवर्गी वल साधन : ४७

ग्रह के स्वस्थान

ग्रह सूर्यं चंद्र मंगल बुध गुर शुक्र हानि

राशि श्र ¥ १-८ ३-६ ९-१२ २-७ १०-११ {२) उच्च बरू

ग्रहो के उच्च और नीच राशि अंश का चक्र नीचे दियः है।

ग्रह सूर्यं चंद्र मंगल वुध गुरु शुक्र शनि उच्च राशि मेष वृष मकर कन्या कर्क मीन तुळा

रा० रा ० रा० रा० रा ० रा० रा०

परमोच्चराऽअंश ०-१० १-३ ९-२८ ५-१५ ३-५ ११-२७ ६-२० नीच राशि तुला वृश्चिक ककं मीन मकर कन्या मेष

रा ० रा० रा० रा ० रा० रा० रा ०

परम नीच रा०भंश६-१० ७-३ ३-२८ ११-1५ ९-५ ५-२७ ०-२० उच्च बळ साधन

उच्च और नीच बल का मंतर ६१८०० है । इसका बिश्वा बल निकालने को

९ का भाग देने से उच्च बल निकल आता है। १८००-९२०1 इस प्रकार ग्रह

पूणं उच्च होने पर २० विश्वा बल पाता है। वीच के अंश का वल अनुपात से

निकाला जाता है । यह रीति केवल वर्ष में उपयोगी है, जातक में नहीं।

(ग्रह्‌ स्पष्ट ग्रह नीच)=शेष, यदि शेष ६ राशि से अधिक हो तो पड़भाल्प करना

पड़ता है। अर्थात्‌ उस १२ राशि में से घटा देने से ६ राशि से कम हो जाता है ।

यही पडभाल्प क्रिया है ।

यदि ग्रह से नीच घटाने पर ६ राशि से कम वचे तो उसे पड़भाल्प करने की

आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि वह ६ से कम है। इससे १२ राशि में नहीं घटाना

पड़ता । ग्रह की राशि से नीच की राशि बड़ी होने के कारण न घट सके तो ग्रह की

राशि में १२ राशि जोड़कर उप्तमें से नीच की राशि घटाना । इस प्रकार शेष की

शुद्धि करने के उपरांत राशि के अंद्यादि बनाकर ९ का भाग देना तो कला विकला

में उच्च बल प्राप्त होता है ।

उच्च बल सायन का उदाहरण

(१) सूर्यस्पष्ट ११-५-३३'-७” ४-२५-३ ३-७” नीच ६-१०-२-० के अंश 1४५-३३-७ -+- ९८१७-१०” उच्चबल

शेष= ४-२५-३३-७

(२) चंद्र ५-२८0-४९-५” १२९-०-०/-०”

नीच ७-३ -२ =° १९-२५-४९-५

शेपः=१०-२५-४९-५ शेष=१¬४-१०-५५

यह ६ से अधिक है ८३४-१०-५५/ -<- ९=३'-४७/' उच्चबल

४८ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफल खण्ड

शा (३) मंगल ९रा-२२0-२>-३९” १२-०°-० =°

नीच ३ -२८०७३००७ १०२५-०३९.

शेष १०-२५-०-९ "ब-४-१२-३१

यह ६ से अधिक है =३४-५९-२१~-९=३'-५३'" उच्चवल

(४) बुध ११-१७-२-१५ २"-२/-१५/-- ९-०/-१३” उच्चबलः

नीच ११-१५-०-२

शेष ० -२ २०१५

(५) गुष ६-५४३-५२ १२-० =३'¬ 4

नीच ९-५ “९००० -४४-ए२

शेष ९-०-४४-५० =२-२९-१५-८ यह ६ से अधिक है =८९०-१५'-=” --९=९'-५५'” उच्चवल

(६) शुक्र १११६-५५-११ ५-१९-५५११”

नीच ५-२७ -० =° २१६९-१५--११ २. ९२१८-५२ उच्चबल

शेष ५१५-५५११

(७) शनि २-२६-१४:-४७ २-६-१४४७

नीच ०-२०-० ०० =६६ १४-४७ + ९८७-२१ उच्चबल

शेष २-६ -१४¬ ४७

उच्च बल सारिणी

उच्च बल साधन के लिए सारिणी भी होती है। जिभसे सुगमता से उच्च बळ

निकल आता है। सारिणी आगे दी है।

सारिणी देखने की रीति

अह स्पष्ट में से नीच घटाने पर जो शेष रहे यदि वह शेष ६ राशि से अधिक

हो तो १२ राशि में से घटाकर षड्भाल्प कर लेना शुद्ध शेष की जो राशि हो वह्‌

बाई ओर खड़े कोठे में दी है और उसके अंश सबसे ऊपर दिये हैं । इन दोनों के सीध

में जो कला विकला के अंश प्राप्त होंगे वही कलात्मक उच्च बल होगा । यह उच्च

बल केवल राशि अंश का निकला है। अब कला विकला का उच्च बल और

निकालने को रहा । इसका भी उच्च बल नीचे की बताई रीति से निकाल कर पूर्व

प्राप्त उच्च बल में जोड़ दो शेप राशि आदि पूरे का उच्च बळ निकल आता है।

कहा का बल निकालने के लिए कला को अंश मान लो। यदि वह ३० से अधिक

है तो उसके राशि अंश बना लो और उस राशि अंश के अनुसार जो उच्च बल प्रात्त

होगा वह विकला प्रति विकला होगी ।

उदाहरण (१) सूर्य का शेष=४¬२५°¬३ ३-७ =४रा-२५=१६'-६/-४०

३३-३३ =१रा-३ का न ३-४०

=१६-१०-२० उच्च बल

वृहत्पंचवर्गी वल साधन : ४९

(२) चंद्र-शेष षड्भाल्प-१-४0-१०(-५५/१-४-३/-४६//-४०

५९-५९०-१-२९ का 15-50 7 उच्च बल =३-४७-४६-४५

(३) मंगल -षड्भाल्प शेष=१-४०-५९=२१--१-४=३-४६-४०

५९=५९०-१-२९ का औँ ६-३२३-२० उच्च बल =३-५३-१३-२०

(४) बुधस्शेष ०-२९२-१५ =०=२=०'-१३”-२०

२'=२'=०रा-२°का ०-१३-२०उच्च ॐ बळ =०-१३-३३-२० (४) गुरु=ुषड़भाल्प शेष=२--२९°-१५-==२-२९०-९-५३-२०

१११५८०३५० का १-४०१ ॐ उच्च वल =९- ५५-० (६) शुक्र=शेष ५-१९०-५५'-११”=५-१९१=१८'-४६”-४०

01८ + CSO २४९८-५५ ८१-२५ का नमन न लत उच

(७) बनि-शेष २-६°--१४'-४७'=२-६०=७-२०¬०

१ १-३३-२० १४८१४ ४१४९-८०-१४? ८०-१४ का ने Serer यु)22 उच उच्च वल

सारिणी बनाने की रीति

६ राशि-१५०१ में २० कला बल तो १० में पछ$-३=०'-६//-४०° इस प्रकार

प्रत्येक अंश के लिए ०-६-४०” बल जोड़ने जाने से सारिणी वन जायगी । १" में

०(-६/-४० कला बल तो १ में=०”-०”-६/-४० वल आता है। यहाँ कला

का पृथक चक्र बनाने की आवश्यकता नहीं पड़ी । कला को अंश मान लेने से, और

उसकी राशि अंश बना लेने से विकलात्मक उच्च बल निकल आता है ।

उच्च बल सारिणी

अंश ० १ २ ३ ४४६ ७ ८ ९१०१११२ १३

राशि ० ० ० ० ० ० ० ० ० १ १ १ १ १

० ६ १३ २० २६ ३३ ४० ४६ ५३ ० ६ १३ २० २६

० ४० २० ० ४० २७ ० ४० २० ० ४० २० ० ४०

१५ १६ १७ १८ १९ २० २१ २२ २३ २४ २५ २६ २७ २८

१ १ १ २ २ २ २ २ २२२२३ हे

४० ४६ ५३ ० ६ १३ २० २६ ३३ ४० ४६ ५३ ० ६

० ४० २० ० ४० २० ० ४० २० ० ४० २० ० ४७

अंश

मंश

अंश

अंश

१३ २० २६ ३३

० ४० २० ० ४० २० ० ४० २०

१५ १६ १७ १८ १९ २० २१ २२ २२

८८ ७. inborn) (REY

२० २६ ३३ ४० ४६ ५३ ० ६ १३

० ४० २० ० ४० २० ० ४० २०

० १ २ ३ ४ ५ ६ ७ ८

१० १० १० १० १० १० १० १० १०

० ६१३२० २६ ३३ ४० ४६ ५३

० ४० २० ० ४० ० ० ४० २०

१५ १६ १७ १८ १९ २० २१ २२ २३

११ ११ ११ १२ १२ १२ १२ १२ १२

४० ४६ ५३ ० ६ १३ २० २६ ३३

० ४० २० ० ४० २० ० ४० २०

cp RR ५० ६ ७ ८

१३ १३ १३ १३ १३ १३ १४ १४ १४

२० २६ ३३ ४० ४६ ५३ ० ६१३

० ४० २० ० ४० २० ० ४० २०

१५ १६ १७ १८ १९ २० २१ २२ २३

१५ १५ १५ १५ १५ १५ १५ १५ १५

० ६१३२० २६ ३३ ४० ४६ ५३

० ४० २० ० ४० २० ० ४० २०

० १ २३ ३ ४ ५ ६ ७ ८

१६ १६ १६ १७ १७ १७ १७ १७ १७

४० ४६ ५३ ० ६१३ २० २६ ३३

० ४० २० ० ४० २० ० ४० २०

९ १० ११ १२ डी ४. ४ ४

२० २६ ३३ ४०

० ४० २० २०

२४ २५ २६ २७

६ ६ ६ ६

० ६ १३ २०

० ४० २० ०

९ १० ११ १२

९ १० ११ १२

१७ १७ १७ १८

४० ४६ ५३ ०

० ४० २० ०

१५ १६ १७ १८

१८ १८ १८ १८

२० २६ ३३ ४०

० ४० २० ०

४६

४० २० अन्य प्रक्रार से उच्च बल सारिणी

२१ २२ २३

१९ १९ १९

°

६ ४० १२

२०

वृहत्पंचवर्गी बल साधन :

२४ २५

१९ १९

२० २६

४०

२६ २७ रद

१९ १९ १९

४६

० ४०

३३

२०

४०

ग्रह स्पष्ट के अंकों पर से उच्च वल प्रत्येक ग्रहों का प्राप्त हो जाता है । सुर्यं उच्च बल सारिणी

अंश

0

मेष

अंश

अंश

मि.

अंश

०५१ र रे

१८ १९ १९ १९

५३ ० ६ १३

२० ० ४० २०

१५ १६ १७ १८

१९ १९ १९ १९

६ २० १३ ६

४० ० २० ४०

° १ ३.३

१७ १७ १७ १७

४६ ४० ३३ २६

४० ० २० ४०

१५ १६ १७ १८

१६ १६ १५ १५

६ ०५३४६

Yo ० २० ४०

-० १ २ ३

१४ १४ १४ १४

२६ २० १३ ६

१४० ० २० ४०

१५ १६ १७ १८

१२ १२ १२ १२

४६ ४० ३३ २६

४० ० २० ४०

० १ २ ३

११ ११ १० १०

६ ०५२३४६

४० ०२०४०

१०

२०

२५

पद

२०

१०

१६

४०

इसमें ग्रह से नीचे घटाने की या षड्भाल्प करने की आवश्यकता नहीं है। सीधे

५२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफक खण्ड

सि०

अंश

मट भं

अंश

oA उ

१५ १६ १७ १८

९ ९९९

२६ २० १३ ६

४० ० २० ४०

9१ YY

७ ७ ७ ७

४६ ४० ३३ २६

४० ० २० ४०

१५ १६ १७ १८

६६५५

६ ० ५३ ४६

४० ० २० ४०

० ७१. २; ३

४ ४ ४ '४

२६ २० १३ ६

४० ० २० ००

१५ १६ १७१०

RRR २५ र

४६ ४० ३३ २६

४० ० २० ४०

० १ २ २ ११००

६ ० ५३४६

४० ० २० ४०

१५ १६ १७ १८

० ० ० ०

३३ ४० ४६ ५२३

२० ० ४० २०

०१२३

२०२0 २ २

१३ २० २६ ३३

२० ० ४० २०

१५ १६ १७ १८

३ ४ ४ ४

५३ ० ६ १३

२० ० ४० २०

१९ २१

४६

१४०

~

२२

४०

२३ ७

st डी

=O

4 6 ०Al

भश ०

अंश ०

अंश ०१ २३ ४ १०. १२ १२ १२ १२ १२

अंश ० १ २३ ४

११ १५ १५ १५ १५ १६ मी. ३३ ४० ४६ ५३ ०

१५ १६ १७ १८ १६ १७ १७ १७ १७ १७

१३ २० २६ ३३ ४० २० ० ४०२० ०

चन्द्र की उच्चबल सारिणी

अंश ० १ २ ३ ४

० १६ १६ १६ १६ १६ मेष २० २६ ३३ ४० ४६

० ४० २० ० ४०

वृहत्पंचवर्गी वल साधन ; ५३

११

१२ १४ ७ छ

|

५४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वषंफल खण्ड

१५ १६ १७ १८

१८ १८ १८ १८ ० ६१३२०

०४०२० ०

अंश ०१२३

१ १९ १९ १९ २०

वृष ४० ४६ ५३ ०

०४० २० ०

१५ १६ १७ १८

१८ १८ १८ १८ ४० ३३ २६ २०

० २० ४० ० अंग ७१२ ३

२ १७ १६ १६ १६ मिथुन ० ५३ ४६ ४०

० २० ४० ०

१५ १६ १७ १८

१५ १५ १५ १५

२०१३ ६ ०

० २० ४० ०

अंश ०१२ ३

ह १३ १३ १३ १३ कके ४० ३३ २६ २०

०२०४० ०

१५ १६ १७ १८

१२ ११ ११ ११

० ५३ ४६ ४०

०२०४ ०

अंश ० १२ ३

४ १० १० १० १० सिंह २०१३ ६ ०

० २४ ०

१५ १६ १७ १८

८ ८ ८ ८ ४० ३३ २६ २०

० २० ४० ०

१९

३३

२०

१९

१४

५३

२०

१२

१२

२०

१९

११

३३

२०

श्रे

२०

१९

१३

२०

२०

२०

११

२६

४०

भ्‌

४६

Yo

२०

४०

२१ वृ

४०

२२

पद

४६

४०

१९

३३

२०

२३

पेठ

५३

२०

१९

२६

४०

२२

वृहत्पंचवर्गी बल साधन : ५५

अंश ०१२३ ४ ५ ६ ७ ८ ९ १० ११ १२ १३ १४ ५ ७ ६ ६ ६ ६ दा ६ दा ६ छा YL NTN कन्या ० ५३ ४६ ४० ३३ २६ २० १३ ६ ० ५३ ४६ ४० ३३ २६ ०२०४० ० २० ४० ० २० ४० ० २० ४० ० २० ४०

१५ १६ १७ १८ १९ २० २१ २२ २३ २४ २५ २६ २७ २८ २९ ५ ५५ ५ ४ ४ ४ ४ ४ ४ ४ ४ ४ ३३

२०१३ ६ ० ५३ ४६ ४० ३३ २६ २० १३ ६ ५३ ४६

०२०४० ० २० ४० २० ४० २० ४० ० २० ४०

ROR Tg है ७ ८५ ९ १० ११ १२ १३ १४ ६ है ३ ३ ३ ३ ३ REAR रु २२७7२ २०0०

० २० ४० ० २० ४०

१५ १६ १७ १८ १९ २० २

RA AE AA

० ५३ ४६ ४० ३३ २६ २० १३ ६ ० ५३ ४६ ४० ३३ २६

०२०४० ० २० ४० ० २० ४० ० २० ४० ० २० ४०

°

द्‌ ३ तुला ४० ३३ २६ २० १३ ६ ० ५३ ४६ ४० ३३ २६ २० १३ ६

0

१ १

अंश ० १२३ ४ ४५ ६ ७ ८ ९ १० ११ १२ १३ १४

७ 0०:00: 197 ०४०० ०10) ०००० ७०७३० १. ७१

वृ २०१३ ६ ० ६ १३ २० २६ ३३ ४० ४६ ५३ ६ १३

°

०२०४० ० ४० २० ० ४० २० ० ४० २० ०

१५ १६ १७ १८ १९ २० २१ २२ २३ २४ २५ २६ २७ २८ २९

MATE PRS RN कार कक्कर

२० २६ ३३ ४० ४६ ५३ ० ६ १३ २० २६ ३३ ४०

०४०२० ० ४० २० ० ४० २० ० ४० २० ०

अंश ० १२ ३ ४ ५ ६ ७ ८ ९ १० ११ १२. १३ १४

द ३1३ ३ ३.३ २० हू हू

ध० ० ६ १३ २६ २० ३३ ४० ४६ ५३ ० ६ १३ २० २६ ३३

०४०२० ० ४० २० ० ४० २० ० ४० २० ० ४० २०

१५ १६ १७ १८ १९ २० २१ २२ २३ २४ २५ २६ २७ २८ २९ दी ढी डा VET OS पथ रा कीत १ ६

४० ४६५३ ० ६ १३ २० २६ ३३ ४० ४६ ५३ ० ६ १३

० '४० २० ० ४० २० ० ४० २० ० ४० २० ९ ४० २० अंश ० १२ ३ ४ ५ ६ ७ ८ ९ १० ११ १२ १३ १४ ६६६ ६ ६ ६ ७ ७ ७ ७ ७ ७ ७ ७७ मकर २० २६ ३३ ४० ४६ ५३ ० ६ १३ २० २६ ३३ ४० ४६ ५३

०४०२० ० ४० २० ० ४० २० ० ४० २० ० ४० २०

५६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थं वर्षफल खण्ड

अंश १५ १६ १७ १८ १९

९ छ ८ ८ रू ८

म. ० ६१३२० २६

०४०२० ० ४०

अंश ०१२३ ४

१० ९ ९ ९ १० १०

कु० ४० ४६ ५३ ० ६

० ४० २० ० ४०

१५ १६ १७ १८ १९

११ ११ ११ ११ ११

२० २६ ३३ ४० ४६

० ४० २० ० ४०

अंश ०१२ ३ ४ ११ १३ १३ १३ १३ १३ मी० ० ६ १३ २० २६

० ४० २० ० ४०

१५ १६ १७ १८ १९ १४ १४ १४ १५ १५ ४०४६५३ ० ६

० ४० २० ० ४०

मंगल की उच्च बल सारिणी

अंश ०१२३ ४ ० १३१३१२ १२ १२ मेष ६ 0 ५३ ४६ ४०

४० ०२०४० ०

१५ १६ १७ १८ १९ ११ ११ ११ १४ ११ २६२० १३ ६ ०

४० ० २० ४० ०

अंश 0१२३ ४ eS ९, “९ «टु

वृष ४६ ४० ३३ २६ २० ४० ०२०४० ०

१५ १६ १७ १८ १९

८ ८ ७ ७ ७

६ ०५३४६ ४० ४० ० २० ४०

२०

३२ ० २०

२१

२२ द

४६

२३ `

५३

२०

१०

३३

२०

२२३

१२

१३

२०

Sec

अंश ० १

२ ६ ६

मिथुन२६ २०

Yo ०

१५ १६

अंश ०

३ ३

०९ >9 ०2 29

न “ती ~ 6००9-60 ० ow

A. श्थ 6

५.9 ०

सिंह १३ २०

अश ०

५ ३

कन्या ३३ ४०

२० ०

१५ १६

शश

१३ २०

२०

तु. ५३

२०

१२

२०

१७

¥

३३

२०

वृहत्पंचवर्गी वल साधन : ५७

०० ११ १२ १३ १४ ५ ५ १५५ २० १३ ६ ० ५३

० २० ४० ०२०

२५ २६ २७ २८ २९

३ ३ ३ ३ ३

४० ३३ २६ २० १३

० २० ४० ०२०

१० ११ १२ १३ १४

२ A ANA

० ५३ ४६ ४० ३३

० २० ४० ०२०

२५ २६ २७ २८ २९

० ० ० ० ० २०१३ ६ ० ६

० २० ४० ० २०

१० ११ १२ १३ १४

INN NN

२० २६ ३३ ४० ४६

० ४० २० ० ४०

२५ २६ २७ २८ २९

३ २ २ ३

० ६ १३ २० २६

० ४० २० ० ४०

१० ११ १२ १३ १४ ४ ४ ४ ४५ ४

४० ४६ ५३ ० ६

० ४० २० ० ४०

२५ २६ २७ २८ २९

६ ६ ६ ६ ६

२० २६ ३३ ४० ४६

० ४० २० ० ४०

१० ११ १२ १३ १४

द ८ ८ ८ ८

० ६ १३ २० २६

० ४० २० ० ४०

५८ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफल खण्ड

अंश

अंश

जा

अंश

अंश

१०

१५ १६ १७ १८

८ ८ ८ ८

३३ ४० ४६ ५३

२० ० ४० २०

० १२ ३

१० १० १० १०

१३ २० २६ ३३

२० ० ४० २०

१५ १६ १७ १८

११ १२ १२ १२

५३२ “ ६ १२

२० ० ४० २०

9 गी है 0

१३ १३ १३ १३

३३ ४० ४६ ५३

२० ० ४० २०

१५ १६ १७ १८

१५ १५ १५ १५

१३ २० २६ ३३

२० ० ४० २०

03२0 RR

१६ १७ १७ १७

भरे ० ६ १३

२० ० ४० २०

१४ १६ १७ १८ १८ १८ १८ १८

३३ ४० ४६ ५३

२० ० ४० २०

कक्कर हरे

१९ १९ १९ १९

४६ ४० ३३ २६

४० ० २० Yo

१५ १६ १७ १८

१८ १८ १७ १७

६ ० ५३ ४६

४० ० २० ४०

१९ २० २१ २२

ENT किक 1

७ ६ १३ २०

० ४० २० ०

४५६ ७

१० १० १०

४० ४६ ५३ ०

० ४० २० ०

१९ २० २१

१२ १२ १२

२० २६ ३३

० ४० २० ०

४ ५ ६ ७

१४ १४ १४ १४

० ६ १३ २०

० ४० २० ०

१९ २० २१ २२

१५ १५ १५ १६

४० ४ ष्‌ ५३ °

० ४० २० ०

४ ५ ६ ७

१७ १७ १७

२० २६ ३३

० ४० २० ०

१९ २० २१

१९ १९ १९

० ६ १३

० ४० २० ०

४ ५ ६ ७

१९ १९ १९

२० १३ ६ ०

० २० ४० ०

१९ २० २१

१७ १७ १७

४० ३३ २६

० २० ४० ०

२३ २४ २५ २६

७ ७-४

२६ ३३ ४० ४६

४० २० ० ४०

८ ९ ११

११ ११ ११

६ १३ २६

२० ० ४०

२४ २६

१२ १३

५३ ० ६

२० ० ४०

८ ९ १० ११

१४ १४ १४

२६ २३ ४०

४० २० ०

२३ २४ २५

१६ १६ १६

६ १३ २०

४० २० ०

८ ९१०

१७ १८ १८

४६ ५३ ० ६

२० ०

२४

१९

३३

२० ०

८ ९

१८

४६

Yo ०

२४

१७

१३ ६ ०

४०

वृहत्पंचवर्गी बल साधन : ५९.

अंश ० १२ ३ ४ ५६०७ ८ ९१०११ १२ १३ १४ ११ १६ १६ १६ १६ १६ १५ १५ १५ १५ १५ १५ १५ १५ १५ १४ मी. २६ २० १३ ६ ० ५३ ४६ ४० ३३ २६ २२ १३ ६ ० ५३

४० ० २० ४० ० २० ४० ० २० ४० ० २० ४० ० २०

१५ १६ १७ १८ १९ २० २१ २२ २३ २४ २५ २६ २७ २८ २९. १४ १४ १४ १४ १४ १४ १४ १४ १३ १३ १३ १३ १३ १३ १३ ४६ ४० ३३ २६ २० १३ ६ ० ५३ ४६ ४० ३३ २६ २० १३

४० ० २० ४० ० २० ४० ० २० ४० ० २० ४० ० २०.

बुध उच्चबल सारिणी

अंश ० १२ ३४४५ ६ ७ ८ ९ १० ११ १२ १३ १४ ० १-१ १ २.२ २.२ २ २२ २ २ RRR मेष ४० ४६ ५३ ० ६ १३ २० २६ ३३ ४० ४६ ५३ ० ६ १३

० ४० २० ० ४० २० ० ४० २० ० ४० २० ४० २०

१५ १६ १७ १८ १९ २० २१ २२ २३ २४ २५ २६ २७ २८ २९.

है १ ३ ३ ३ ३४४४४४४०२४ ४४

२० २६ ३३ ४० ४६ ५३ ० ६ १३ २० २६ ३३ ४० ४६ १३

० ४० २० ० ४० २० ० ४० २० ० ४० २० ० ४० २०

० १ २ ३ ४ ५ ६ ७ ८ ९ १० ११ १२ १३ १४

१ ५ ५ ५ मे ५ ५ ५ ५ ५ ६ ६ ६ ६ ६ ६

० ६१३ २० २६ ३३ ४० ४६ ५३ ० ६ १३ २० २६ ३३

० ४० २० ० ४० २० ० ४० २० ० ४०२० ० ४० २०

१५ १६ १७ १८ १९ २० २१ २२ २३ २४ २५ २६ २७ २८ २९

६ ६ ६ ७ ७ ७ ७ ७ ७ ७ ७ ७ ७ ८ द

४० ४६ ५३ ० ६ १३ २० २६ ३३-४० ४६ ५३ ० ६ १३

० ४० २० ० ४० २० ० ४० २० ० ४० २० ० ४० २०

अंश ० १ २ ३ ४ ५ ६ ७ ८ ९ १० ११ १२ १३ १४

२ ८ . ८. थे ८” ८: द. ९०९ ९-९. ० ९000 2 २)

मिथुन २० २६ ३३ ४० ४६ १३ ० ६ १३ २० २६ ३३ ४० ४६ ५३

० ४० २० ० ४०.२० ० ४० २० ० ४० २० ० ४० २०

१४ १६ १७ १८ १९ २० २१ २२ २३ २४ २५ २६ २७ २८ २९

१० १० १० १० १० १० १२? १० १० ११ ११ ११ ११ ११ ११

० ६ १३ २० २६ ३३ ४० ४६ ५३ ० ६ १३ २० २६ ३३

० ४० २० ० ४० २० ० ४० २० ० ४० २० ० ४० २०

६०

अंश

अंश

अंश

अदा

तु०

११ ११ ११ १२

४० ४६ ५३

७ ४० २०

१५ १६ १७ १८

१३ १३ १३ १३

२० २६ ३३ ४०

७ ४० २०

१ २९ ३

१५ १५ १५ १५

० ६ १३ २०

"७० ४० २०

१५ १६ १७ १८

१६ १६ १६ १७

४० ४६ ५३ ०

० ४० २० ०

१ २ २३

१८ १८ १८ १८

२० २६ रेरे ४०

० ४० २० ०

१५ १६ १७ १८

२० १९ १९ १९

० ५२३ ४६ ४०

० २० ४० ०

० १ २ ३

'१८ १८ १८ १८

२० १३ ६ ०

० २० ४०

१५ १६ १७ १८

१६ १६ ६ १६

४० २३ २६ २०

० २० ४० ०

० १ २ ३ १५ १५ १४ १४ ० ५३ ४६ ४०

° २० ४०

°

१२

१ (२९ २ ४ ४ RS

१२

१३

२०

२०

१३

५२

२०

: सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षेफल खण्ड

८ ९

१२ १२ १२ १२

२० २६ ३३ ४०

० ४० २० °

२१ २२ २३

१४ १४

१३

२०

१५

५३

२०.०

२३

१७

३३

२०

1

१९

१३

२०

२३

१९

१३ १४

१३ १३

६१३.

४० २०

२८ २९

१४ १४

४६ ५३

४० २०

१३ १४

१६ १६

२६ ३३

४० २०

२८ २९

१८ १८

६१३

४० २०

१३ १४

१९१९

४६ ५२

४०-२०

२८ २९

१८ १८

३३ २६

२० ४०

१३ १४

१६१६ ५३ ४९

२० ४०

२९ २९

१५ १५

३५

२० ४०

१३ १४

१३ १३

३३ २६

२० ४०

अंश

अंश

अंश

१०

अंश

~

० २४ A ००

०८ 0

०२

वृहत्पञ्चवर्गी बल साधन : ६१

२४ २५ २३ २७

१२ १२ १२ १२

२० १३ ६ ०

० २० ४० ०

९ १० ११ १२

१० १० १० १०

४० ३३ २६ २०

० २० ४० ०

२४ २५ २६ २७

८ ८ ८

५३ ४६ ४०

० ०८ ० ~ ० ०

२० २९

११ ११

५३ ४६

२० ४०

१३ १४

१० १२

१३ ६

२० ४०

२८ २९

६२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वपं फल खण्ड

गुरु उच्च बल सारिणी

० १ २ ३ ४ ४५ ६ ७

RE ER RR २९०१०१०

२६ ३३ ४०

अंश

0

मेष

अंश

जै ~

अंश

४०

१५

११

२०

१६

११

१३

२०

१२

५३

२०

१६

१४

३३

२०

४६

४०

१७

११

२६

४०

१३

५३

२०

१९

११

३३

२०

0.1

१३

१३

२०

१९

१४

५३

० ६

० ४०

२० २१

१०

५३

२५

१०

१७

२५

२५