सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 108, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंत्व ॐ समुद्रः प्रथमे विधर्मन् देवेभ्यः सोम मत्सरः.. (११) हे सोम! आप को सब स्तोत्रों से पवित्र किया गया है. आप खासतौर पर अन्न, धन प्राप्त कराने वाले व देवताओं को आनंद देने वाले हैं. आप को उन्हीं के लिए खासतौर पर तैयार किया जाता है. (११) पवमाना असृक्षत पवित्रमति धारया. मरुत्वन्तो मत्सरा इन्द्रिया हया मेधामभि प्रया ॐ सि च.. (१२) सोम मरुद्गणों से युक्त, आनंददायी, इंद्र के प्रिय व अन्नमय हैं. यज्ञ में काम आने वाला शुद्ध सोमरस पवित्र हो कर पात्र में गिरता है. (१२) छठा खंड प्र तु द्रव परि कोशं नि षीद नृभिः पुनानो अभि वाजमर्ष. अश्वं न त्वा वाजिनं मर्जयन्तो ऽ च्छा बर्ही रशनाभिर्नयन्ति.. (१) हे सोम! आप शीघ्र आइए. आप कलश में विराजिए. यजमान आप को पवित्र करते हैं. आप यजमान को अन्न व धन दीजिए. जैसे बलवान घोड़े की रस्सी अंगुली से पकड़ कर उस को शुद्ध किया जाता है, वैसे ही यजमान पवित्र कर के आप को यज्ञशाला तक पहुंचाते हैं. (१) प्र काव्यमुशनेव ब्रुवाणो देवो देवानां जनिमा विवक्ति. महिव्रतः शुचिबन्धुः पावकः पदा वराहो अभ्येति रेभन्.. (२) यजमान उशना ऋषि की तरह स्तोत्रों का पाठ करते हैं. वे देवताओं से संबंधित वृत्तांत बताते हैं. वे व्रती हैं. सोमरस प्रकाशमान व पवित्रकारी है. उत्तम सोमरस आवाज करते हुए कलश में छनता है. (२) तिस्रो वाच ईरयति प्र वह्निर्ऋतस्य धीतिं ब्रह्मणो मनीषाम्. गावो यन्ति गोपर्ति पृच्छमानाः सोमं यन्ति मतयो वावशानाः.. (३) यजमान ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद के मंत्रों से सोम की स्तुति करते हैं. उन की स्तुति ज्ञानमय है. वह स्तुति यज्ञ को धारण करने वाली है. जैसे गायों के पास बैल जाते हैं, वैसे ही आराधक उत्तम सुख की इच्छा से सोम के पास स्तुति करने के लिए जाते हैं. (३) अस्य प्रैषा हेमना पूयमानो देवो देवेभिः समपृक्त रसम्. सुतः पवित्रं पर्येति रेभन् मितेव सद्म पशुमन्ति होता.. (४) सोमरस सोने से शुद्ध किया गया है. यह दिव्य और पवित्र है. इसे देवताओं को चढ़ाया जाता है. निचोड़ा गया सोमरस वैसे ही पात्र में जाता है, जैसे ग्वाला गाय के बाड़े में जाता है. (४) ebook converter DEMO Watermarks*