सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 109, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंसोमः पवते जनिता मतीनां जनिता दिवो जनिता पृथिव्याः. जनिताग्नेर्जनिता सूर्यस्य जनितेन्द्रस्य जनितोत विष्णोः.. (५) सोमरस बुद्धिदायी, स्वर्गलोक को प्रकाशित करने वाला, पृथ्वी को पुष्ट करने वाला व आनंददायी है. वह अग्नि, इंद्र और विष्णु को आनंद देने वाला है. इसे पात्र में तैयार किया जाता है. (५) अभि त्रिपृष्ठं वृषणं वयोधामङ्गोषणमवावशन्त वाणीः. वना वसानो वरुणो न सिन्धुर्वि रत्नधा दयते वार्याणि.. (६) सोम तीन स्थानों— अंतरिक्ष, वनस्पति और शरीर में वास करने वाले हैं. वे शक्तिमान और अन्नदाता हैं. उपासक ऊंची वाणी से उन की स्तुति करते हैं. जल के देवता वरुण की तरह जल में मिलने वाले सोम उपासकों को धन देते हैं. (६) अक्रांत्समुद्रः प्रथमे विधर्मन् जनयन् प्रजा भुवनस्य गोपाः. वृषा पवित्रे अधि सानो अव्ये बृहत्सोमो वावृधे स्वानो अद्रिः.. (७) सोम जलमय हैं. वे यज्ञ के रक्षक, इच्छा पूरक और शक्तिवर्धक हैं. वे यजमानों को सब से ज्यादा उत्साह और उन्नति देने वाले हैं. (७) कनिक्रन्ति हरिरा सृज्यमानः सीदन्वनस्य जठरे पुनानः. नृभिर्यतः कृणुते निर्णिजं गामतो मतिं जनयत स्वधाभिः.. (८) यजमान सब ओर से दबा व कूट कर सोमरस निकालते हैं. वह हरा व पवित्र है. वह लकड़ी के बरतन में गिरता हुआ बारबार आवाज करता है. उसे गाय के दूध में मिलाया जाता है. इस से हवि बनाई जाती है. यजमान इस की स्तुति करते हैं. (८) एष स्य ते मधुमाँ इन्द्र सोमो वृषा वृष्णः परि पवित्रे अक्षाः. सहस्रदाः शतदा भूरिदावा शश्वत्तमं बर्हिरा वाज्यस्थात्.. (९) हे इंद्र! आप का प्रिय सोमरस इच्छा पूरी करता है. आप के लिए यह मधुर शक्तिदायी सोमरस छन रहा है. यह सैकड़ों, हजारों प्रकार का धन देने वाला है. सोम प्राचीन काल से ही यज्ञ में जा कर विराजते हैं. (९) पवस्व सोम मधुमाँ ऋतावापो वसानो अधि सानो अव्ये. अव द्रोणानि घृतवन्ति रोह मदिन्तमो मत्सर इन्द्रपानः.. (१०) हे सोम! आप मधुर, जल में मिलने वाले व ऊंचे स्थान पर विराजते हैं. आप छन कर पवित्र होते हैं. आप आनंददायी व इंद्र के लिए जल में मिल कर तैयार होते हैं. (१०) सातवां खंड ebook converter DEMO Watermarks*