सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 203, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंनौवां अध्याय पहला खंड शिशुं जज्ञान ॐ हर्यतं मृजन्ति शुम्भन्ति विप्रं मरुतो गणेन. कविर्गीर्भिः काव्येन कविः सन्त्सोमः पवित्रमत्येति रेभन्.. (१) हे सोम! आप ब्राह्मण हैं. आप बच्चे की तरह सब के मन को खिला देते हैं. मरुद्गण आप को परिमार्जित करते हैं. कवि काव्यों से आप की स्तुति करते हैं. आप आवाज करते हुए पवित्र हो जाते हैं. (१) ऋषिमना य ऋषिकृत्स्वर्षाः सहस्रनीथः पदवीः कवीनाम्. तृतीयं धाम महिषः सिषान्सन्त्सोमो विराजमनु राजति ष्टुप्.. (२) हे सोम! आप ऋषियों जैसे मन वाले और उन जैसा गुण प्रदान करने वाले हैं. आप तीसरे धाम के राजा इंद्र को और तेजस्वी बनाने वाले हैं. आप कवियों की पदवी और सहस्रकर्मा हैं. (२) चमूषच्छ्येनः शकुनो विभृत्वा गोविन्दुर्दप्स आयुधानि बिभ्रत्. अपामूर्मिं ॐ सचमानः समुद्रं तुरीयं धाम महिषो विवक्ति.. (३) हे सोम! आप अस्त्रशस्त्रधारी हैं व गायों के दूध में मिलाए जाते हैं. आप की लहरें समुद्र की लहरों के समान और राजा हैं. आप तुरीय धाम (मोक्ष धाम) में विराजते व सुशोभित होते हैं. (३) एते सोमा अभि प्रियमिन्द्रस्य काममक्षरन्. वर्धन्तो अस्य वीर्यम्.. (४) ये सोम इंद्र को प्रिय हैं. सोम कामनाओं की वर्षा करते हैं. ये उन के (इंद्र के) वीर्य को बढ़ाने वाले हैं. (४) पुनानासश्चमृषदो गच्छन्तो वायुमश्विना. ते नो धत्त सुवीर्यम्.. (५) हे सोम! आप पवित्र हैं. आप वायु और अश्विनीकुमारों के साथ जाइए, जिस से हम श्रेष्ठ वीर्य धारण कर सकें. (५) इन्द्रस्य सोम राधसे पुनानो हार्दि चोदय. देवानां योनिमासदम्.. (६) हे सोम! आप पवित्र हैं. आप इंद्र की आराधना हेतु हमें हार्दिक प्रेरणा देने की कृपा ebook converter DEMO Watermarks*