सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 221, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे अग्नि! वसिष्ठ ऋषि विशेष बुद्धिपूर्वक आप की स्तुति करते हैं. आप वरुण व मित्र स्वरूप हैं. आप के धन कल्याणकारी हों. आप अपनी मंगलकारी भावनाओं से हमारी रक्षा कीजिए. (३) महाँ इन्द्रो य ओजसा पर्जन्यो वृष्टिमाँ इव. स्तोमैर्वत्सस्य वावृधे.. (४) इंद्र महान व प्रकाशमान हैं. वे अपने प्रिय भक्तों की स्तुतियों से बढ़ोतरी पाते हैं. वे बरसने वाले बादलों की भांति हैं. उपासक उन के पुत्र की तरह हैं. (४) कण्वा इन्द्रं यदक्रत स्तोमैर्यज्ञस्य साधनम्. जामि ब्रुवत आयुधा.. (५) हे इंद्र! ऐसा कहा जाता है कि उस समय यज्ञ की निगरानी या रक्षा के लिए किसी भी साधन की जरूरत नहीं रह जाती, जब कण्व जैसे ऋषि अपनी स्तुतियों से आप को यज्ञ का रक्षक बना लेते हैं. (५) प्रजामृतस्य पिप्रतः प्र यद्भरन्त वह्नयः. विप्रा ऋतस्य वाहसा.. (६) दिव्य अग्नियां आकाश में भर जाती हैं. वे तीव्र गति से इंद्र को यज्ञ स्थान पर पहुंचा देती हैं. तब ब्राह्मणगण उन की स्तुति करते हैं. (६) नौवां खंड पवमानस्य जिघ्नतो हरेश्चन्द्रा असृक्षत. जीरा अजिरशोचिषः.. (१) हे सोम! आप हरे हैं. आप के रस की धारा प्रसन्नतादायक है. वह छन कर और साफ हो कर झरती है. आप शत्रुनाशक हैं और सब जगह जा सकते हैं. (१) पवमानो रथीतमः शुभ्रेभिः शुभ्रशस्तमः. हरिश्चन्द्रो मरुद्गणः.. (२) हे सोम! आप पवित्र, उच्चतम स्थान पर शोभित, उज्ज्वलतर से उज्ज्वलतम, हरित शोभा वाले व सब को प्रसन्नता देने वाले हैं. आप को पुष्ट बनाने में मरुद्गण भी आप की सहायता करते हैं. (२) पवमान व्यश्रुहि रश्मिभिर्वाजसातमः. दधत्स्तोत्रे सुवीर्यम्.. (३) हे सोम! आप पवित्र हैं. आप घोड़े की तरह अपनी किरणों से सर्वत्र पहुंच जाते हैं. आप यजमानों को अच्छा वीर्य (श्रेष्ठ संतान) प्रदान करते हैं. (३) परीतो षिञ्चता सुत १s सोमो य उत्तम १s हविः. दधन्वाँ यो नर्यो अप्स्व ३ s न्तरा सुषाव सोममद्रिभिः.. (४) यजमान जल में सोम को मिलाते हैं. वे पत्थरों से कूट कर सोमरस निकालते हैं. वह देवताओं के लिए श्रेष्ठ है. यजमान उस से सब ओर सींचें. (४) ebook converter DEMO Watermarks*