सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 222, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंनूनं पुनानो ऽ विभिः परि स्रवादब्धः सुरभिंतरः. सुते चित्वाप्सु मदामो अंधसा श्रीणन्तो गोभिरुत्तरम्.. (५) हे सोम! छान कर, शुद्ध बना कर आप को गायों के दूध के साथ मिला लिया जाता है. इतना हो जाने पर आप को जल में मिलाया जाता है. तब आप अच्छी तरह सेवन योग्य हो जाते हैं. आप अमर और बहुत सुगंध वाले हैं. (५) परि स्वानश्चक्षसे देवमादनः क्रतुरिन्दुुर्विचक्षणः.. (६) सोमरस विलक्षण है और देवताओं के लिए आनंददायी है, यज्ञ का प्रमुख साधन है. सब को देखने के लिए सोम कलश में स्थित रहने की कृपा करें. (६) असावि सोमो अरुषो वृषा हरी राजेव दस्मो अभि गा अचिक्रदत्. पुनानो वारमत्येष्यव्यय ९४ श्येनो न योनिं घृतवन्तमासदत्.. (७) सोम हरे रंग के, शक्तिवर्द्धक, प्रकाशित व राजा के समान दर्शनीय हैं. इन के रस को भेड़ के बालों से बनी छलनी में छाना जाता है. गाय के दूध में मिल कर सोमरस और अधिक पवित्र हो जाता है. वह जल से भरे हुए कलशों में वैसे ही प्रवेश करता है, जैसे वेग से उड़ता हुआ पक्षी उतरता है. (७) पर्जन्यः पिता महिषस्य पर्णिनो नाभा पृथिव्या गिरिषु क्षयं दधे. स्वसार आपो अभि गा उदासरन्त्सं ग्रावभिर्वसते वीते अध्वरे.. (८) सोम पर्वत पर निवास करते हैं. वे पर्वत पृथ्वी की नाभि पर स्थित हैं और उन के पत्ते खूब बड़ेबड़े होते हैं. बरसने वाले बादल उन के पिता हैं. वे गाय के दूध, पानी और स्तुतियों से यज्ञ स्थल पर पधार वहां प्रतिष्ठित होते हैं. (८) कविर्वेधस्या पर्येषि माहिनमत्यो न मृष्टो अभि वाजमर्षसि. अपसेधन् दुरिता सोम नो मृड घृता वसानः परि यासि निर्णिजम्.. (९) हे सोम! आप विद्वानों द्वारा जाने जाते हैं और जलमय हैं. आप छलनी में छन कर वैसे ही द्रोणकलश में वेग से जा कर स्थित रहते हैं, जैसे संग्राम स्थल पर जाने वाले घोड़े वेग से वहां जा कर स्थित रहते हैं. आप हमें बुरी बातों और आदतों से दूर रखिए. हमें सब सुख प्रदान कीजिए. (९) दसवां खंड श्रायन्त इव सूर्य विश्वेदिन्द्रस्य भक्षत. वसूनि जातो जनिमान्योजसा प्रति भागं न दीधिमः.. (१) हे यजमानो! इंद्र उसी तरह प्रचुर वैभव को बांटते हैं, जैसे सूर्य किरणों को (अपने में) बांटते हैं. हम उन की कृपा से वैसे ही धन पाते हैं, जैसे पिता की कृपा से हम उन से संपत्ति ebook converter DEMO Watermarks*