भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 223, कुल 310 में से

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पृष्ठ 223

का हिस्सा पाते हैं. (१) अलर्षिरातिं वसुदामुप स्तुहि भद्रा इन्द्रस्य रातयः. यो अस्य कामं विधतो न रोषति मनो दानाय चोदयन्.. (२) इंद्र सज्जनों (भद्र) को धन प्रदान करते हैं. उन के दान बहुत कल्याणकारी हैं. यजमान जब उन से कुछ चाहते हैं तो उन का मन उन्हें उस दान के लिए प्रेरित करता है. अतः हे यजमानो! आप सब उन की स्तुति करो. (२) यत इन्द्र भयामहे ततो नो अभयं कृधि. मघवञ्छग्धि तव तन्न ऊतये वि द्विषो वि मृधो जहि.. (३) हे इंद्र! आप हमें उन सब से अभय प्रदान कीजिए, जिन से हमें भय लगता है. आप हम से विद्वेष रखने वालों को नष्ट कीजिए. आप हिंसकों का नाश कीजिए. आप हमारी रक्षा कीजिए. आप सामर्थ्यवान हैं. (३) त्व २४ हि राधसस्पते राधसो महः क्षयस्यासि विधर्ता. तं त्वा वयं मघवन्निन्द्र गिर्वणः सुतावन्तो हवामहे.. (४) हे इंद्र! आप धनपति, बहुत धनधारी एवं उपास्य हैं. हम यजमान शुद्ध और पवित्र सोमरस का आनंद लेने के लिए आप को आमंत्रित करते हैं. (४) ग्यारहवां खंड त्व २४ सोमासि धारयुर्मन्द्र ओजिष्ठो अध्वरे. पवस्य म २४ हयद्रयिः.. (१) हे सोम! आप बलिष्ठ व पवित्र हैं. आप यज्ञ में धारा से वैभवयुक्त मार्ग बनाते हैं. आप धनदाता व शक्तिदाता हैं. आप शुद्ध हो कर कलश में विराजिए. (१) त्व २४ सुतो मदिन्तमो दध्वन्वान्मत्सरिन्तमः. इन्दुः सत्राजिदस्तुतः.. (२) हे सोम! आप मददायी, बलधारी, यज्ञ के मूलाधार, प्रकाशित, स्फूर्तिदायी और शत्रुओं को जीतने वाले हैं. आप को जीता नहीं जा सकता. (२) त्व २४ सुष्वाणो अद्रिभिर्भ्यर्ष कनिक्रदत्. द्युमन्त २४ शुष्ममा भर.. (३) हे सोम! पत्थरों से कूटकूट कर आप का रस निकाला व निचोड़ा जाता है. आप हमें ओज और सामर्थ्य प्रदान करने की कृपा करें. आप आवाज करते हुए कलश में प्रवेश करने की कृपा कीजिए. (३) पवस्व देववीतय इन्दो धाराभिरोजसा. आ कलशं मधुमान्त्सोम नः सदः.. (४) हे सोम! आप मधुरतायुक्त हैं. आप देवताओं की तृप्ति के लिए अपनी ओजयुक्त

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