सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 226, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंआराधना करने वाले हम लोगों की स्तुति सुनेंगे? (६) गायन्ति त्वा गायत्रिणो ऽ र्चन्त्यर्कमर्किणः. ब्रह्माणस्त्वा शतक्रत उद् वंशमिव येमिरे.. (७) हे इंद्र! आप सैकड़ों कार्य करने वाले हैं. हम यजमान मंत्रों से आप के लिए यज्ञ करते हैं. हम आप की महिमा का गुणगान करते हैं. आप ब्रह्मविद हैं. बांस की तरह आप को ऊंची पदवी प्रदान करते हैं. (७) यत्सानोः सान्वारुहो भूर्यस्पष्ट कृत्वम्. तदिन्द्रो अर्थं चेतति यूथेन वृष्णिरेजति.. (८) यजमान सोमवल्ली आदि समिधा लाने के लिए पर्वत के शिखर पर जाते हैं. वे अनेक कर्म वाले यज्ञ करते हैं. इंद्र यजन करने वाले यजमान के मन के उद्देश्य को जान जाते हैं. तब वे यजमान की इच्छा पूरी करने के लिए अन्य देवताओं के साथ यज्ञ में जाने के लिए तैयार होते हैं. (८) युंक्ष्वा हि केशिना हरी वृषणा कक्ष्यप्रा. अथा न इन्द्र सोमपा गिरामुपश्रुतिं चर.. (९) हे इंद्र! आप सोमरस पीने वाले हैं. आप के घोड़े गरदन पर अच्छे बाल वाले व मजबूत अंगों वाले हैं. आप उन घोड़ों को रथ में जोतिए और हमारी स्तुति सुनने के लिए यज्ञ में पधारिए. (९)