सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 227, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंग्यारहवां अध्याय पहला खंड सुसमिद्धो न आ वह देवाँ अग्ने हविष्मते. होतः पावक यक्षि च.. (१) हे अग्नि! आप पवित्र करने वाले हैं. आप यजमान के कल्याण हेतु देवताओं का आह्वान करिए. देवताओं को हवि पहुंचाने के लिए हवि स्वीकार कीजिए. आप यज्ञ को सफल बनाने की कृपा कीजिए. (१) मधुमन्तं तनूनपाद्यज्ञं देवेषु नः कवे. अद्या कृणुहूतये.. (२) हे अग्नि! आप विद्वान् व ऊपर की ओर जाने वाले हैं. आप हमारे कल्याण के लिए तनमन के निमित्त पोषक मधुरता से भरी हवियों को देवताओं के लिए स्वीकार कीजिए. उन हवियों को स्वीकारने के बाद देवताओं तक पहुंचाने की कृपा भी कीजिए. (२) नराश ॐ समिह प्रियमस्मिन्यज्ञ उप ह्वये. मधुजिह्व ॐ हविष्कृतम्.. (३) हे अग्नि! आप देवताओं को प्रिय, उन के लिए प्रसन्नतादायी, मीठी जिह्वा वाले व पूजनीय हैं. हम इस यज्ञ में अपनी हवियों को देवों तक पहुंचाने का अनुरोध करते हैं. (३) अग्ने सुखतमे रथे देवाँ ईडित आ वह. असि होता मनुर्हितः.. (४) हे अग्नि! आप देवताओं को साथ ले कर अपने सुखदायी रथ में यज्ञ स्थान तक पधारिए. आप देवताओं को बुलाने वाले व मनुष्यों का हित साधने वाले हैं. (४) यदद्य सूर उदिते ऽ नागा मित्रो अर्यमा. सुवाति सविता भगः.. (५) सूर्य के उदित होने पर पवित्र मित्र, अर्यमा, सविता व भग हमें मनचाहा धन प्राप्त कराने की कृपा करें. (५) सुप्रावीरस्तु स क्षयः प्र नु यामन्त्सुदानवः. ये नो अ ॐ हो ऽ तिपिप्रति.. (६) हे देवताओ! आप उत्कृष्ट कल्याण करने वाले, हमारे श्रेष्ठ रक्षक व यज्ञ स्थान के वासी हैं. आप अहम्, दंभ आदि राक्षसों (बुरी प्रवृत्तियों) से हमारी रक्षा करने की कृपा करें. (६) उत स्वराजो अदितिरदब्धस्य व्रतस्य ये. महो राजान ईशते.. (७) देवताओं की माता अदिति समेत सभी देवतागण हमारे व्रत सिद्ध करें. वे इन्हें सिद्ध ebook converter DEMO Watermarks*