भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 230, कुल 310 में से

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पृष्ठ 230

प्रवाहित होइए. (११) एवामृताय महे क्षयाय स शुक्रो अर्ष दिव्यः पीयूषः.. (१२) हे सोम! आप चमकीले, दिव्य, अमृतमय और अमरता के लिए पृथ्वी पर क्षरित (प्रवाहित) होने की कृपा कीजिए. (१२) इन्द्रस्ते सोम सुतस्य पेयात्क्रत्वे दक्षाय विश्वे च देवाः.. (१३) हे सोम! आप अपने पुत्रों की प्रार्थना सुन लीजिए. यज्ञ में इंद्र व सभी देवता आप के रस को पीने की कृपा करें. (१३) तीसरा खंड सूर्यस्येव रश्मयो द्रावयित्नवो मत्सरासः प्रसुतः साकमीरते. तन्तुं ततं परि सर्गास आशवो नेन्द्रादृते पवते धाम किंचन.. (१) सोम की धाराएं द्रवित होती हुई पात्र में सूर्य की किरणों की तरह फैल रही हैं. इंद्र के अलावा वे किसी अन्य को नहीं मिलतीं. (१) उपो मतिः पृच्यते सिच्यते मधु मन्द्राजनी चोदते अन्तरा सनि. पवमानः सन्तनिः सुन्वतामिव मधुमान् द्रप्सः परि वारमर्षति.. (२) सोम मधुर व बुद्धिवर्द्धक हैं. सोमरस इंद्र को प्रेरित करने वाला है. यजमान सोमरस निचोड़ते व उसे जल में मिलाते हैं, उस को और परिष्कृत करते हैं. (२) उक्षा मिमेति प्रति यन्ति धेनवो देवस्य देवीरुप यन्ति निष्कृतम्. अत्यक्रमीदर्जुनं वारमव्ययमतकं न निक्तं परि सोमो अव्यत.. (३) निचोड़ा जाता हुआ सोमरस आवाज करता है व दिव्य रूप को प्राप्त करता है. गायों के दूध से उस को शुद्ध बनाया जाता है. वह दिव्य, प्रकाशमान व अव्यय है. (३) अग्निं नरो दीधितिभिररण्योर्हस्तच्युतं जनयत प्रशस्तम्. दूरेदृशं गृहपतिमथव्युम्.. (४) हे नरो! अग्नि पूजनीय हैं. वे हमारा भरणपोषण करते हैं. वे गृहपति, अच्युत और दूर से ही दर्शनीय हैं. आप सभी अरणि मंथन से अग्नि को प्रकट करने की कृपा कीजिए. (४) तमग्निमस्ते वसवो नृण्वन्त्सुप्रतिचक्षमवसे कुतश्चित्. दक्षाय्यो यो दम आस नित्यः.. (५) हे अग्नि! आप ज्वलनशील प्रकाशमान हैं. आप को हम घर में प्रज्वलित करते हैं. आप सुंदर (दर्शनीय) स्वरूप वाले हैं. यजमान अपनी रक्षा के लिए आप को यज्ञ में प्रतिष्ठित करते ebook converter DEMO Watermarks*