भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 231, कुल 310 में से

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पृष्ठ 231

हैं. (५) प्रेद्धो अग्ने दीदिहि पुरो नो ऽ जस्रया सूर्म्या यविष्ठ. त्वा ꣳ शश्वन्त उप यन्ति वाजाः.. (६) हे अग्नि! आप शाश्वत, शक्तिशाली और अजस्र हैं. आप भलीभांति प्रज्वलित होइए. आप ज्वालाओं से प्रज्वलित होने की कृपा कीजिए. हम आप को जौ मिश्रित हवि भेंट करते हैं. (६) आयंगौः पृश्निरक्रमीदसदनमातरं पुरः. पितरं च प्रयन्त्स्वः.. (७) हे अग्नि! आप बहुरंगी, गतिशील व (सूर्य रूप में) पूर्व दिशा में उदित होते हैं. आप पितृलोक (अंतरिक्षलोक) में प्रतिष्ठित होते हैं. (७) अन्तश्चरति रोचनास्य प्राणादपानती. व्यख्यन्महिषो दिवम्.. (८) हे सूर्य! आप स्वर्गलोक को प्रकाश और तेज से भर देते हैं. आप का तेज आकाश और पृथ्वी के बीच चमकता रहता है. (८) त्रि ꣳ शद्धाम वि राजति वाक्यपतङ्गाय धीयते. प्रति वस्तोरह द्युभिः.. (९) तीस घड़ियों (१२ घंटे) तक अग्नि (सूर्य रूप में) अपनी तेजोमयता से प्रकाशमान रहते हैं. उस समय स्वर्गलोक द्वारा आप को यजमानों की बुद्धिपूर्वक की गई स्तुतियां प्राप्त होती हैं. (९) ebook converter DEMO Watermarks*