सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 232, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंबारहवां अध्याय पहला खंड उपप्रयन्तो अध्वरं मन्त्रं वोचेमाग्नये. आरे अस्मे च शृण्वते.. (१) अग्नि उत्तम यज्ञ करने वाले यजमान की प्रार्थना सुनने के लिए तैयार हैं. हम उन की उपासना करते हैं. (१) यः स्नीहितीषु पूर्व्यः संजग्मानासु कृष्टिषु. अरक्षद्दाशुषे गयम्.. (२) अग्नि हमेशा प्रकाशित रहते हैं. यजमान जब प्रेम भाव से मिल कर रहते हैं तो वे उन के वैभव की रक्षा करते हैं. (२) स नो वेदो अमात्यमग्नी रक्षतु शन्तमः. उतास्मान्पात्व ॐ हसः.. (३) अग्नि बहुत कल्याणकारी हैं. वे हमें पापों (बुरी प्रवृत्तियों) से दूर करने व हमारे वैभव की रक्षा करने में हमारी सहायता करने की कृपा करें. (३) उत ब्रुवन्तु जन्तव उदग्निर्वृत्रहाजनि. धनञ्जयो रणेरणे.. (४) अग्नि युद्धों में दुश्मनों को हराते हैं व उन का धन जीतते हैं. वे प्रकट हो गए हैं. मंत्र गायक पुरोहित को उन की स्तुति करनी चाहिए. (४) अग्ने युंक्ष्वा हि ये तवाश्वासो देव साधवः. अरं वहन्त्याशवः.. (५) हे अग्नि! आप के घोड़े शीघ्र जाने वाले हैं. आप के घोड़े भी सामर्थ्यवान हैं. आप उन को रथ में जोतिए. (५) अच्छा नो याह्या वहाभि प्रया ॐ सि वीतये. आ देवान्त्सोमपीतये.. (६) हे अग्नि! आप सोमपान व देवताओं को हमारी ओर उन्मुख करने की कृपा कीजिए. (६) उदग्ने भारत द्युमदजस्रेण दविद्युतत्. शोचा वि भाह्यजर.. (७) हे अग्नि! आप जग के पालक व अक्षुण्ण (कभी क्षीण न हो सकने वाले) हैं. आप भी प्रकाशित होइए और जग को भी प्रकाशित कीजिए. आप प्रज्वलित हो कर उत्तरोत्तर बढ़ोतरी प्राप्त कीजिए. (७) ebook converter DEMO Watermarks*