भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 233, कुल 310 में से

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पृष्ठ 233

प्र सुन्वानायान्धसो मर्तो न वष्ट तद्वचः. अप श्वानमराधसं १४ हता मखं न भृगवः.. (८) सोमरस रसीला व सेवन के योग्य है. सोम के लिए की गई प्रार्थनाओं को लालची कुत्ते न सुन सकें. भृगु ऋषि ने जैसे मख नामक राक्षस को मारा था, वैसे ही आप उन कुत्तों को अपराधी की तरह ही दंडित कीजिए. (८) आ जामिरत्के अव्यत भुजे न पुत्र ओण्योः. सरज्जारो न योषणां वरो न योनिमासदम्.. (९) सोम भाई जैसे प्रिय हैं, मातापिता की भुजाओं में संरक्षित बेटे जैसे हैं व कामी आदमी जैसे स्त्री की ओर और वर कन्या की ओर आकर्षित होता है, वैसे ही सोम द्रोणकलश की ओर जा रहे हैं. (९) स वीरो दक्षसाधनो वि यस्तस्तम्भ रोदसी. हरिः पवित्रे अव्यत वेधा न योनिमासदम्.. (१०) सोम पवित्र, हरे, पोषक, वीर व उत्तम रसायनों से भरे हैं. वे स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक को अपने प्रकाश से भर देते हैं. द्रोणकलश में यजमान के घर जाने की तरह प्रवेश करते हैं. (१०) दूसरा खंड अभ्रातृव्यो अना त्वमनापिरिन्द्र जनुषा सनादसि. युधेदापित्वमिच्छसे.. (१) हे इंद्र! आप का कोई शत्रु नहीं जन्मा और समस्त उपासकों को ही अपना बंधु स्वीकारते हैं. आप दुश्मनों के प्रति बंधु भाव से रहित और शत्रुओं के नाश की इच्छा रखते हैं. आप सब के नियंत्रक हैं. (१) न की रेवन्त १४ सख्याय विन्दसे पीयन्ति ते सुराश्वः. यदा कृणोषि नदनु १४ समूहस्यादित्पितेव हूयसे.. (२) हे इंद्र! आप शक्तिशाली हैं. धन का गर्व करने वाले के आप सखा नहीं होते. जो सुरा पी कर आप को पीड़ित करते हैं, उन के भी आप सखा नहीं होते. जो ज्ञान, गुण संपन्नों के साथ मिल कर चलते हैं, उन को आप पिता के समान प्रेम करते हैं. (२) आ त्वा सहस्रमा शतं युक्ता रथे हिरण्यये. ब्रह्मयुजो हरय इन्द्र केशिनो वहन्तु सोमपीतये.. (३) हे इंद्र! आप का रथ सुनहरा है. आप के घोड़े संकेत मात्र से रथ में जुत जाते हैं. आप के वे घोड़े आप को सोमरस पिलाने के लिए रथ में बैठा कर यज्ञ स्थान में लाने की कृपा करें. (३)