भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 234, कुल 310 में से

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पृष्ठ 234

आ त्वा रथे हिरण्यये हरी मयूरशेप्या. शितिपृष्ठा वहतां मध्वो अन्धसो विवक्षणस्य पीतये.. (४) हे इंद्र! आप के घोड़े मोर जैसे रंग और सफेद पीठ वाले हैं. वे आप को यज्ञ स्थान पर लाने की कृपा करें, ताकि आप मीठा अमृत जैसा सोमरस पी सकें. (४) पिबा त्व ३ स्य गिर्वणः सुतस्य पूर्वपा इव. परिष्कृतस्य रसिन इयमासुतिश्चारुर्मदाय पत्यते.. (५) हे इंद्र! आप पूजनीय हैं. सोमरस मददायी, आनंदवर्द्धक व गुणमय है. आप सब से पहले इस साफ छने हुए सोमरस को पीने की कृपा करें. (५) आ सोता परि षिञ्चताश्वं न स्तोममप्तुरं रजस्तुरम्. वनप्रक्षमृदप्रुतम्.. (६) हे यजमानो! सोमरस घोड़े की तरह वेगवान, जलमय व प्रकाश का विस्तारक है. आप सोमरस छान कर, जल में मिला कर तैयार कीजिए. (६) सहस्रधारं वृषभं पयोदुहं प्रियं देवाय जन्मने. ऋतेन य ऋतजातो विवावृधे राजा देव ऋतं बृहत्.. (७) सोमरस दिव्य गुण वाला, सुख बढ़ाने वाला, प्रिय और जल में मिल कर बढ़ोत्तरी पाता है. हे यजमानो! आप दूध मिला हुआ सोमरस देवताओं के लिए तैयार कीजिए. आप परिष्कृत सोमरस देवताओं के लिए तैयार कीजिए. (७) तीसरा खंड अग्निर्वृत्राणि जङ्घनद्दद्रविणस्युर्विपन्यया. समिद्धः शुक्र आहुतः.. (१) हे अग्नि! आप भलीभांति प्रदीप्त, आप प्रकाशमान, धनदाता हैं. आप हवि से पोषण पाते हैं. आप शत्रुओं का नाश करने की कृपा कीजिए. (१) गर्भे मातुः पितुः पिता विविद्युतानो अक्षरे. सीदन्नृतस्य योनिमा.. (२) हे अग्नि! आप पृथ्वी माता के गर्भ में विशेष रूप से प्रकाशित हैं व अंतरिक्ष में पिता की भूमिका में विराजमान हैं. अग्नि यज्ञ में वेदी पर प्रतिष्ठित हैं. (२) ब्रह्म प्रजावदा भर जातवेदो विचर्षणे. अग्ने यद्द्यौद्यदिवि.. (३) हे अग्नि! जोजो सुख स्वर्गलोक में उपलब्ध हैं, आप उन सुखों को हमें प्राप्त कराने की कृपा कीजिए. आप सर्वद्रष्टा व विलक्षण हैं. आप हमें ब्रह्मज्ञान व संतान प्रदान कीजिए. (३) अस्य प्रेषा हेमना पूयमानो देवो देवेभिः समपृक्त रसम्. सुतः पवित्रं पर्येति रैभन्मितेव सद्म पशुमन्ति होता.. (४) ebook converter DEMO Watermarks*

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