सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 235, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंयजमान के पशु आदि वाले घर में प्रवेश करने के समान कूट व छान कर तैयार किया हुआ सोमरस द्रोणकलश में प्रवेश करता है. प्रकाशमान सोमरस स्वर्ण के समान कांतिमान है और प्रकाशमान वह देवताओं से मिलता है. (४) भद्रा वसा समन्या ३ वसानो महान्कविर्निर्वचनानि श २४ सन्. आ वच्यस्व चम्वोः पूयमानो विचक्षणो जागृविर्देववीतौ.. (५) हे सोम! आप जाग्रत, विलक्षण, महान, कवि, अनिर्वचनीय, प्रशंसित एवं कल्याणकारी हैं. आप वीरता से समन्वित (युक्त) हैं. आप पवित्र बरतनों में प्रवेश कीजिए. (५) समु प्रियो मृज्यते सानो अव्ये यशस्तरो यशमां क्षैतो अस्मे. अभि स्वर धन्वा पूयमानो यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (६) हे सोम! क्षिति (पृथ्वी) पर प्रकट हों आप यशस्वियों में यशवान, छका देने वाले और पवित्र हैं. हे यजमानो! आप सब स्वस्ति वचनों से सदैव उच्च स्वर से प्रार्थनाएं करते हुए सोम की स्तुति कीजिए. (६) एतो न्विन्द्र २४ स्तवाम शुद्ध २४ शुद्धेन साम्ना. शुद्धैरुक्यैर्वावृध्वा २४ स २४ शुद्धैराशीर्वान्ममत्तु.. (७) हे इंद्र! हम शुद्ध सामगायन से आप की स्तुति व शुद्ध मदमस्त बनाने वाला सोमरस आप को भेंट करते हैं. हम शुद्ध वचनों वाली स्तुतियों से आप की बढ़ोतरी की कामना करते हैं. (७) इन्द्र शुद्धो न आ गहि शुद्धः शुद्धाभिरूतिभिः. शुद्धो रयिं नि धारय शुद्धो ममद्धि सोम्य.. (८) हे इंद्र! आप शुद्ध हैं. हम शुद्ध वाणी से आप की स्तुति करते हैं. आप हमें भी शुद्ध बनाइए. आप मेरे द्वारा भेंट किए गए इस शुद्ध सोमरस को स्वीकारिए. आप हमारे लिए शुद्ध धन धारण करिए. (८) इन्द्र शुद्धो हि नो रयि २४ शुद्धो रत्नानि दाशुषे. शुद्धो वृत्राणि जिघ्नसे शुद्धो वाज २४ सिषाससि.. (९) हे इंद्र! आप शुद्ध हैं. आप हमें शुद्ध बल दीजिए. आप शुद्ध होइए और विघ्न बाधाओं को दूर कीजिए. हमारे दुश्मनों को मारिए. आप हमें शुद्ध धन और रत्न व ऐश्वर्य आदि दीजिए. (९) चौथा खंड अग्ने स्तोमं मनामहे सिद्धमद्य दिविस्पृशः. देवस्य द्रविणस्यवः.. (१) ebook converter DEMO Watermarks*