भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 236, कुल 310 में से

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पृष्ठ 236

हे अग्नि! आप स्वर्गलोक का स्पर्श करते हैं. हम आप से वैभव चाहते हैं. हम कल्याणदायी स्तोत्रों से आप की स्तुति करते हैं, आप को मनाते हैं. (१) अग्निर्जुषत नो गिरो होता यो मानुषेष्वा. स यक्षद्दैव्यं जनम्.. (२) हे अग्नि! आप मनुष्य को दिव्यता प्रदान कीजिए. आप यज्ञ के प्रमुख और मनुष्यों के लिए होता (पुरोहित की तरह) हैं. आप हमारी वाणी सुनने की कृपा कीजिए. (२) त्वमग्ने सप्रथा असि जुष्टो होता वरेण्यः. त्वया यज्ञं वि तन्वते.. (३) हे अग्नि! आप वरेण्य (सर्वश्रेष्ठ वरण करने योग्य), होता व यज्ञ में प्रमुख हैं. हम आप के द्वारा यज्ञ का विस्तार करते हैं. (३) अभि त्रिपृष्ठं वृषणं वयोधामङ्गोषणमवावशंत वाणी:. वना वसानो वरुणो न सिन्धुर्वि रत्नधा दयते वार्याणि.. (४) हे सोम! आप अन्नदाता, धनदाता और रत्नदाता हैं. आप की ओर हमारी वाणियां दौड़ती हैं. आप स्वयं भी वाणीमय (आवाज करने वाले), वनवासी, जलमय एवं तीनों कालों में बरसने वाले हैं. (४) शूरग्रामः सर्ववीरः सहावान् जेता पवस्व सनिता धनानि. तिग्मायुधः क्षिप्रधन्वा समत्स्वषाढः साह्वान्पृतनासु शत्रून्.. (५) हे सोम! आप सब से शूरवीर, सहनशील, विजेता, धनदाता, पवित्र, शीघ्र गति वाले, तीक्ष्ण अस्त्रशस्त्र वाले व शत्रुओं को हराने वाले हैं. आप द्रोणकलश में बरसिए. (५) उरुगव्यूतिरभयानि कृण्वन्त्समीचीने आ पवस्वा पुरन्धी. अपः सिषासन्नुषसः स्व ऽ ३ र्गाः सं चक्रदो महो अस्मभ्यं वाजान्.. (६) हे सोम! आप विस्तृत पथवान, निर्भय, स्वर्ग और पृथ्वी के योजक (जोड़ने वाले, मिलाने वाले) हैं. आप उषा और सूर्य की किरणों से पोषण पाते हैं. आप आवाज करते हुए छन कर पवित्र होइए. आप हमारे लिए धन दीजिए. (६) त्वमिन्द्र यशा अस्यृजीषी शवसस्पतिः. त्वं वृत्राणि ह २४ स्यप्रतीन्येक इत्पुर्व्वनुत्तश्चर्षणीधृतिः.. (७) हे इंद्र! आप यशस्वी, धैर्यवान, दुश्मनों को मारने वाले व शक्ति के स्वामी हैं. आप जैसे देवता के बारे में हम ने पहले नहीं सुना. (७) तमुत्वा नूनमसुर प्रचेतस २४ राधो भागमिवेमहे. महीव कृत्तिः शरणा त इन्द्र प्र ते सुम्ना नो अश्नवन्.. (८) हे इंद्र! बेटा जैसे पिता से धनभाग चाहता है, वैसे ही हम पिता तुल्य आप से धन चाहते हैं. आप धनवान, ज्ञानवान व शरणदाता हैं. हमें श्रेष्ठ सुख प्रदान करने की कृपा कीजिए. (८) ebook converter DEMO Watermarks*