सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 237, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंयजिष्ठं त्वा ववृमहे देवं देवत्रा होतारममर्त्यम्. अस्य यज्ञस्य सुक्रतुम्.. (९) हे अग्नि! आप इस यज्ञ में श्रेष्ठ कार्य करने वाले हैं. आप भजनीय (भजन करने योग्य) हैं. देवताओं में हम आप का वरण करते हैं. आप अमर व देवताओं में सर्वाधिक दिव्य देव हैं. (९) अपां नपात ꣫ सुभग ꣫ सुदीदितिमग्निमु श्रेष्ठशोचिषम्. स नो मित्रस्य वरुणस्य सो अपामा सुम्नं यक्षते दिवि.. (१०) हे अग्नि! आप सुभग (श्रेष्ठ धन वाले), सुदीप्त (अच्छी तरह प्रकाशित), श्रेष्ठ ज्वालाओं वाले व आकाश के जल को धारते हैं. आप हमें मित्र और वरुण देवता से प्राप्त होने वाला सुख तथा दिव्यलोक का जल प्राप्त कराइए. (१०) पांचवां खंड यमग्ने पृत्सु मर्त्यमवा वाजेषु यं जुनाः. स यन्ता शश्वतीरिषः.. (१) हे अग्नि! आप युद्ध में जिन लोगों को लगाते हैं, उन्हें अन्न व बल प्रदान करते हैं और मृत्यु से उन की रक्षा करते हैं. (१) न किरस्य सहन्त्य पर्येता कयस्य चित्. वाजो अस्ति श्रवाय्यः.. (२) हे अग्नि! आप ने जिस को बल दिया है, उस बलवान वीर को कोई भी नहीं हरा सकता है. (२) स वाजं विश्वचर्षणिर्वद्भिर्भरस्तु तस्ता. विप्रेभिरस्तु सनिता.. (३) हे अग्नि! ब्राह्मणों द्वारा आप की प्रशंसा की जाती है. आप संसार के द्रष्टा हैं. आप घोड़ों के द्वारा हमें युद्ध जिताएं. आप कल्याणकारी हैं. (३) साकमुक्षो मर्जयन्त स्वसारो दश धीरस्य धीतयो धनुत्रीः. हरिः पर्यद्रवज्जाः सूर्यस्य द्रोणं ननक्षे अत्यो न वाजी.. (४) सोमरस दिव्य, पवित्र और हरित आभा वाला है. सूर्य की किरणों से शुद्ध हो कर वह द्रोणकलश में जाता है. वह घोड़े की तरह वेगवान हो कर कलश में जाता है. दस अंगुलियां उस को मसलमसल कर शुद्ध बनाती हैं. (४) सं मातृभिर्न शिशुर्वावशानो वृषा दधन्वे पुरुवारो अद्भिः. मर्यो न योषामभि निष्कृतं यन्त्सं गच्छते कलश उस्रियाभिः.. (५) सोमरस सर्वश्रेष्ठ, देवताओं को प्रिय व बलवान है. वह दूध व जल में ऐसे एकमेक हो जाता है, जैसे पुरुष और स्त्री तथा मां और बच्चा एकदूसरे में एकमेक हो जाते हैं. (५) ebook converter DEMO Watermarks*