सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 238, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंउत प्र पिप्य ऊधर्ध्न्याया इन्दुर्थाराभिः सचते सुमेधाः. मूर्धानं गावः पयसा चमूष्वभि श्रीणन्ति वसुभिर्न निक्तैः.. (६) सोम बुद्धिशाली हैं. वे गायों को दूध से भरपूर करते हैं. गायों के दूध को सोमरस में मिलाया जाता है. लोग जैसे वस्त्रों से अपने को ढकते हैं, वैसे ही गाएं सोमपात्र को (दूध देने के लिए) ढक लेती हैं. (६) पिबा सुतस्य रसिनो मत्स्वा न इन्द्र गोमतः. आपिनो बोधि सधमाद्ये वृधे ३ ऽ स्मां अवन्तु ते धियः.. (७) हे इंद्र! आप के पुत्रों ने रसीला सोमरस तैयार किया है. आप उस को पी कर मस्त होइए. आप उस से अपनी और हमारी बढ़ोतरी कीजिए. आप हमें गोमति (सुबुद्धिवान) बनाइए. आप अपनी बुद्धियों से हमारी बुद्धि की रक्षा कीजिए. (७) भूयाम ते सुमतौ वाजिनो वयं मा न स्तरभिमातये. अस्माञ्चित्राभिरवतादभीष्टिभिा नः सुम्नेषु यामय.. (८) हे इंद्र! हम आप की सुमति से मतिवान व आप के बल से बलवान हों. आप अपने अभीष्ट साधनों से हमारी रक्षा करें. आप हमें सुखी व समृद्ध बनाएं. हमें आप की कृपा प्राप्त हो. (८) त्रिरस्मै सप्त धेनवो दुदुहिरे सत्यामाशिरं परमे व्योमनि. चत्वार्यन्या भुवनानि निर्णिजे चारुणि चक्रे यदृतैरवर्धत.. (९) हे सोम! परम व्योम में सात से तीन गुनी अर्थात् इक्कीस गाएं श्रेष्ठ दूध देती हैं. चार अन्य लोकों के सुंदर जल से सोम की बढ़ोतरी होती है. सोमरस कल्याणकारी चक्र से (क्रम से) प्रवाहित होता है. (९) स भक्षमाणो अमृतस्य चारुण उभे द्यावा काव्येना वि शश्रथे. तेजिष्ठा अपो म २४ हना परि व्यत यदी देवस्य श्रवसा सदो विदुः.. (१०) सोमरस अमृत भक्षण करता है. वह स्वर्ग और पृथ्वी दोनों लोकों को अमृत जैसे जल से भर देता है. जब यजमान देवस्थान को हविमय बनाते हैं तो सोम जल को अपने महत्त्व से तेजोमय बना देते हैं. (१०) ते अस्य सन्तु केतवो ऽ मृत्यवो ऽ दाभ्यासो जनुषी उभे अनु. येभिर्नृम्णा च देव्या च पुनत आदिद्राजानं मनना अगृभ्णत.. (११) सोम मनुष्यों में अमर, अदम्य व दोपायों और चौपायों के संरक्षक हैं. वे मनुष्यों और देवों में राजा हैं. हम उन सोम की उपासना करते हैं. (११) छठा खंड ebook converter DEMO Watermarks*