सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 241, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंतेरहवां अध्याय पहला खंड पवस्व वृष्टिमा सुनो ऽ पामूर्मिं दिवस्परि. अयक्ष्मा बृहतीरिषः.. (१) हे सोम! आप पवित्र व दिव्य, जल को लहराएं. आप अक्षय स्वास्थ्य प्रदान करने की कृपा कीजिए. (१) तया पवस्व धारया यया गाव इहागमन्. जन्यास उप नो गृहम्.. (२) हे सोम! आप उन दिव्य जलधाराओं से पवित्र होइए, जिन से दुधारू गाएं हमारे यहां आ सकें, धनधान्य हमारे घर पहुंच सकें. (२) घृतं पवस्व धारया यज्ञेषु देववीतमः. अस्मभ्यं वृष्टिमा पव.. (३) हे सोम! आप देवताओं द्वारा चाहे गए घृत की पवित्र धाराएं चुआइए. आप हमारे लिए मूसलाधार बरसात कीजिए. (३) स न ऊर्जा व्य ३ व्ययं पवित्रं धाव धारया. देवासः शृणवन् हि कम्.. (४) हे सोम! आप हमें ऊर्जा प्रदान कीजिए. आप अव्यय व पवित्र धारावान हैं. आप धाराओं से दौड़ कर कलश में प्रवेश कीजिए. आप की आवाज सुन कर देवतागण आनंदित हों. (४) पवमानो असिष्यदद्रक्षा २४ सयपजङ्घनत्. प्रत्नवद्रोचयन्नुचः.. (५) पवित्र, शत्रुनाशक, प्रकाशमान और छना हुआ सोमरस द्रोणकलश में झरता है. (५) प्रत्यस्मै पिपीषते विश्वानि विदुषे भर. अरङ्गमाय जग्मये ऽ पश्चादध्वने नरः.. (६) हे यजमानो! इंद्र यज्ञ के संचालक, विश्व के ज्ञाता, अग्रणी, प्रगतिशील व सोमरस पान के इच्छुक हैं. आप इंद्र के लिए सोमरस को द्रोणकलश में भर दीजिए. (६) एमेनं प्रत्येतन सोमेभिः सोमपातमम्. अमत्रेभिर्ऋजीषिणमिन्द्र २४ सुतेभिरिन्दुभिः.. (७) हे यजमानो! सोमरस रसीला है. आप उसे परिष्कृत कीजिए. इंद्र बहुत अधिक सोमरस पीने वाले हैं. वे बहुरुचि से सोमरस पीते हैं. आप इंद्र के पास जा कर प्रार्थना कीजिए. (७) ebook converter DEMO Watermarks*