सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 262, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंसोलहवां अध्याय पहला खंड अभि त्वा पूर्वपीतये इन्द्र स्तोमेभिरायवः. समीचीनास ऋभवः समस्वरन्नुदा गृणन्त पूर्व्यम्.. (१) हे इंद्र! यजमान चाहते हैं कि आप सब से पहले सोमरस पीजिए. यजमान वैदिक मंत्रों से आप की स्तुति कर रहे हैं. आप उचित दृष्टि वाले हैं. रुद्र और ऋभुगण आप की गणना सर्वप्रथम करते हैं. वे भी आप ही की स्तुति करते हैं. (१) अस्येदिन्द्रो वावृधे वृष्ण्य २४ शवो मदे सुतस्य विष्णवि. अद्या तमस्य महिमानमायवो ऽ नु ष्टुवन्ति पूर्वथा.. (२) हे इंद्र! आप सोमरस पी कर प्रसन्न होते हैं. आप यजमान का वीर्य और शक्ति दोनों बढ़ाते हैं. आप महिमावान हैं. यजमान आप की उसी महिमा का बखान करते हैं. (२) प्र वामर्चन्त्युक्थिनो नीथाविदो जरितारः. इन्द्राग्नी इष आ वृणे.. (३) हे इंद्र! हे अग्नि! यजमान आप की अर्चना करते हैं. सामगायक आप के गुण गा रहे हैं. अन्न धन हेतु हम भी आप को आमंत्रित करते हैं. (३) इन्द्राग्नी नवतिं पुरो दासपत्नीरधूनुतम्. साकमेकेन कर्मणा.. (४) हे इंद्र! हे अग्नि! आप ने एक ही बार एक साथ नब्बे नगरों को कंपकंपा दिया. (४) इन्द्राग्नी अपसस्पर्युप प्र यन्ति धीतयः. ऋतस्य पथ्या ३ अनु.. (५) हे इंद्र! हे अग्नि! यज्ञ के होता आदि पुरोहित सत्य के मार्ग से हमारे यज्ञ के पास उपस्थित होते हैं. (५) इन्द्राग्नी तविषाणि वा २४ सधस्थानि प्रया २४ सि च. युवोरप्तूर्य २४ हितम्.. (६) हे इंद्र! हे अग्नि! आप हित साधने वाले हैं. आप के प्रयास सदैव शुभ कार्यों की ओर लगे रहते हैं. (६) शग्ध्यू ३ षु शचीपत इन्द्र विश्वाभिरूतिभिः. भगं न हि त्वा यशसं वसुविद्मनु शूर चरामसि.. (७) ebook converter DEMO Watermarks*