सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 268, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंसिन्धोरुच्छ्वासे पतयन्तमुक्षण २४ हिरण्यपावाः पशुमप्सु गृभ्णते.. (१०) हे सोम! सोमरस में यजमान गाय का दूध मिलाते हैं. उसे पी कर प्रसन्न होते हैं, अनेक प्रकार से उसे अनेक रूपों में तैयार करते हैं. उसे मीठे दूध व सोने जैसे चमकते हुए जल में मिलाते हैं. सोम ऊंचे स्थान से, जल के ऊंचे भाग से गिरते हैं. वे सर्वद्रष्टा हैं. (१०) विपश्चिते पवमानाय गायत मही न धारात्यन्धो अर्षति. अहिर्न जूर्णामिति सर्पति त्वचमत्यो न क्रीडन्नसरद्वृषा हरिः.. (११) हे यजमानो! आप सोम के गुण गाइए. सोम ज्ञानी व हरे हैं. वे विशाल धाराएं धारण करते हैं. सांप के केंचुली बदलने की तरह वे अपनी पुरानी छाल बदल देते हैं. वे घोड़े जैसे खेलते हुए द्रोणकलश में जाते हैं. (११) अग्रेगो राजाप्यस्तविष्यते विमानो अह्नां भुवनेष्वर्पितः. हरिर्घृतस्नुः सुदृशीको अर्णवो ज्योतीरथः पवते राय ओक्यः.. (१२) सोम अग्रगामी हैं, राजा हैं, जल में मिलते हैं और प्रशंसा प्राप्त करते हैं. वे लोकों में दिन के (समय के) मापक, सुंदर व हरे हैं. वे जलवासी, ज्योतिर्मय रथ वाले व धन का भंडार हैं. (१२) ebook converter DEMO Watermarks*