सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 269, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंसत्रहवां अध्याय पहला खंड विश्वेभिरग्ने अग्निभिरिमं यज्ञमिदं वचः. चनो धाः सहसो यहो.. (१) हे अग्नि! आप समस्त अग्नियों के साथ यज्ञ में पधारिए. आप इस यज्ञ में हमारे वचन सुनिए. आप हमें अन्न प्रदान करने की कृपा कीजिए. (१) यच्चिद्धि शश्वता तना देवं देवं यजामहे. त्वे इद्धूयते हविः.. (२) हे अग्नि! हम इंद्र, वरुण और अन्य देवताओं को हवि दे कर भजन करते हैं. वह सब आप तक पहुंचता है. (२) प्रियो नो अस्तु विश्पतिर्होता मन्द्रो वरेण्यः. प्रियाः स्वग्नयो वयम्.. (३) अग्नि हमें प्रिय हैं. वे विश्वपति, होता और वरेण्य हैं. उन्हें हम सब प्रिय हों. (३) इन्द्रं वो विश्वतस्परि हवामहे जनेभ्यः. अस्माकमस्तु केवलः.. (४) हे यजमानो! इंद्र सभी लोकों से ऊपर हैं. लोगों के कल्याण के लिए हम उन का आह्वान करते हैं. आप की कृपा से हम सब का कल्याण हो. (४) स नो वृषन्नमुं चरु २४ सत्रादावन्नपा वृधि. अस्मभ्यमप्रतिष्कुतः.. (५) हे इंद्र! हमारे द्वारा समर्पित हवि ग्रहण कीजिए. हमारी इच्छाओं को खाली न लौटाएं. आप जल्दी से जल्दी फल देने वाले हैं. (५) वृषा यूथेव व २४ सगः कृष्टीरियर्त्योजसा. ईशानो अप्रतिष्कुतः.. (६) हे इंद्र! आप बलवान हैं. आप उसी तरह उपासकों की इच्छा पूरी करने जाते हैं, जैसे गायों के झुंड में बैल जाता है. आप ईश्वर हैं. आप हमारे विरोधी नहीं हो सकते. (६) त्वं नश्चित्र ऊत्या वसो राधा २४ सि चोदय. अस्य रायस्त्वमग्ने रथीरसि विदा गाधं तुचे तु नः.. (७) हे अग्नि! आप हमें संरक्षण दीजिए. आप जो धन अपने रथ से ले जाते हैं, वह हमें दीजिए. आप विलक्षण हैं. हमारी पीढ़ियां भी यशस्वी हों. (७) पर्षि तोकं तनयं पर्तृभिष्वमदब्धैरप्रयुत्वभिः ebook converter DEMO Watermarks*