सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 270, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंअग्ने हेडा ꣲ सि दैव्या युयोधि नो ऽ देवानि हृरा ꣲ सि च.. (८) हे अग्नि! आप सहयोगी व स्वतंत्र हैं. आप अपने रक्षा साधनों से हमारी व पीढ़ियों की रक्षा कीजिए. आप प्राकृतिक प्रकोपों और दुष्ट प्रवृत्तियों से हमें बचाइए. (८) किमित्ते विष्णो परिचक्षि नाम प्र यद्ववक्षे शिपिविष्टो अस्मि. मा वर्पो अस्मदप गूह एतद्यदन्यरूपः समिथे बभूथ.. (९) हे विष्णु! आप सर्वत्र व्याप्त हैं. आप अपना यह विराट् और व्यापक स्वरूप हम से छिपा कर (गुप्त) न रखिए. आप कितने ही रूप क्यों न धारण कर लें फिर भी आप हमारी रक्षा अवश्य करते हैं. (९) प्र तत्ते अद्य शिपिविष्ट हव्यमर्यः श ꣲ सामि वयुनानि विद्वान्. तं त्वा गृणामि तवसमत्यान्-क्षयन्त मस्य रजसः पराके.. (१०) हे विष्णु! आप रश्मिवान व आदरणीय हैं. मैं व विद्वान् भी आप की प्रशंसा करते हैं. हम आप के विष्णुलॊक से दूर हैं, फिर भी हम अपने लोक से आप की वैसे ही प्रशंसा करते हैं, जैसे कोई छोटा भाई करता है. (१०) वषट् ते विष्णवास आ कृणोमि तन्मे जुषस्व शिपिविष्ट हव्यम्. वर्धन्तु त्वा सुष्टुतयो गिरो मे यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (११) हे विष्णु! वषट्कार से हम आप को आमंत्रित करते हैं. आप रश्मिवान हैं. आप हमारी हवि को स्वीकारिए. हमारी अच्छी स्तुतियां आप की बढ़ोतरी करें. आप मंगलकारी आशीर्वादों से हमारा कल्याण करने की कृपा कीजिए. (११) दूसरा खंड वायो शुक्रो अयामि ते मध्वो अग्रं दिविष्टिषु. आ याहि सोमपीतये स्पार्हो देव नियुत्वता.. (१) हे वायु! हम यज्ञ में सब से पहले आप को सोमरस चढ़ाते हैं. आप आदरणीय हैं. हे देव! आप नियुत नामक घोड़े के साथ सोमपान के लिए आ जाइए. (१) इन्द्रश्च वायवेषा ꣲ सोमानां पीतिमर्हथः. युवा ꣲ हि यन्तीन्दवो निम्नमापो न सध्र्यक्.. (२) हे इंद्र! हे वायु! आप सोमपान के योग्य हैं. जलधार जैसे नीचे की ओर जाती है, वैसे ही आप दोनों के लिए सोमरस की धारा पहुंचती है. (२) वायविन्द्रश्च शुष्मिणा सरथ ꣲ शवसस्पती. नियुत्वन्ता न ऊतय आ यात ꣲ सोमपीतये.. (३) ebook converter DEMO Watermarks*