भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 271, कुल 310 में से

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हे इंद्र! हे वायु! आप बलवान व क्षमतावान हैं. आप नियुत्त घोड़े को रथ में जोत कर सोमपान हेतु आइए. (३) अध क्षपा परिष्कृतो वाजाँ अभि प्र गाहसे. यदी विवस्वतो धियो हरि ॐ हिन्वन्ति यातवे.. (४) हे सोम! आप पौष्टिक अन्न देते हैं. आधी रात के बीत जाने पर छने हुए सोम में जल मिलाया जाता है. यजमान की बुद्धि हरित सोमरस को कलश की ओर उन्मुख करती है. (४) तमस्य मर्जयामसि मदो य इन्द्रपातमः. यं गाव आसभिर्दधुः पुरा नूनं च सूरयः.. (५) सोमरस मददायी है. यह इंद्र के पीने योग्य है. इसे आज भी पीया जाता है. यह पहले भी पीया जाता था. सोम को गाएं भी खुशीखुशी खाती हैं. (५) तं गाथया पुराण्या पुनानमभ्यनूषत. उतो कृपन्त धीतयो देवानां नाम बिभ्रतीः.. (६) यजमान पुरानी गाथाओं से सोमरस की उपासना करते हैं. यज्ञ कर्म हेतु चमकता हुआ सोम देवताओं को आहुति के रूप में भी दिया जाता है. (६) अश्वं न त्वा वारवन्तं वन्दध्या अग्निं नमोभिः. सम्राजन्तमध्वराणाम्.. (७) हे अग्नि! आप यज्ञ के सम्राट हैं. घुड़सवार जैसे घोड़े से प्रेम करता है, उसी तरह हम आप से प्रेम व आप को नमस्कार करते हैं. (७) स घा नः सूनुः शवसा पृथुप्रगामा सुशेवः. मीढ्वाँ अस्माकं बभूयात्.. (८) हे अग्नि! हम आप के पुत्र हैं. हम विधिविधान से आप की उपासना करते हैं. आप बहुत शीघ्रगामी हैं. आप हमारे लिए सुखदायी हों. (८) स नो दूराच्चासाच्च नि मर्त्यादघायोः. पाहि सदमिद्विश्वायुः.. (९) हे अग्नि! आप मनुष्यों का भला चाहते हैं. आप दूर और पास दोनों दृष्टियों से शत्रुओं से हमारी रक्षा करने की कृपा कीजिए. (९) त्वमिन्द्र प्रतूर्तिष्वभि विश्वा असि स्पृधः. अशस्तिहा जनिता वृत्रतूरसि त्वं तूर्य तरुष्यतः.. (१०) हे इंद्र! आप युद्धों में स्पर्धा करने वाले सभी शत्रुओं को दूर करते हैं. आप विघ्नहारी हैं. (१०) अनु ते शुष्मं तुरयन्तमीयतुः क्षोणी शिशुं न मातरा. विश्वास्ते स्पृधः श्रथयन्त मन्यवे वृत्रं यदिन्द्र तूर्वसि.. (११) ebook converter DEMO Watermarks*