भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 272, कुल 310 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 272

हे इंद्र! अंतरिक्षलोक और पृथ्वीलोक आप के बल का वैसे ही अनुसरण करते हैं, जैसे मातापिता बच्चे के पीछे चलचल कर उस की रक्षा करते हैं. जब आप वृत्रासुर से युद्ध करते हैं तो आप के सामने युद्ध के लिए तैयार शत्रु के भी हौसले पस्त हो जाते हैं. (११) तीसरा खंड यज्ञ इन्द्रमवर्धद्यद्भूमिं व्यवर्तयत्. चक्राण ओपशं दिवि.. (१) यज्ञ इंद्र की बढ़ोतरी व भूमि को विस्तृत करते हैं. वे स्वर्गलोक से मेघों को वर्षा के लिए प्रेरित करते हैं. (१) व्य ३ न्तरिक्षमतिरन्मदे सोमस्य रोचना. इन्द्रो यदभिनद्वलम्.. (२) इंद्र मेघों को भेदते व अंतरिक्ष में विशेष शोभा बढ़ाते हैं. वे सोमरस से प्रसन्न होते हैं. (२) उद्गा आजदङ्गिरेाभ्य आविष्कृण्वन्गुहा सती:. अर्वाञ्चं नुनुदे वलम्.. (३) सूर्य ने गुफा की किरणों को बाहर निकाल कर उसे अंगिराओं (अंगधारियों) तक पहुंचाया. उन किरणों को छिपा कर रखने वाला राक्षस भाग गया. (३) त्यमु वः सत्रासाहं विश्वांसु गीर्ष्वायतम्. आ च्यावयस्यूतये.. (४) हे इंद्र! आप शत्रुओं को एक साथ मारते हैं. हम अपनी रक्षा के लिए स्तुतियों से आप को आमंत्रित करते हैं. (४) युध्म १७ं सन्तमन्वर्वाण १७ं सोमपामनपच्युतम्. नरमवार्यक्रतुम्.. (५) हे इंद्र! आप युद्ध करते हुए कभी नहीं हारते. सोमपान के लिए आप का मन दृढ़ निश्चय वाला है. हम यज्ञ में आप का सहयोग चाहते हैं. (५) शिक्षा ण इन्द्र राय आ पुरु विद्वां ऋचीषम. अवा नः पार्ये धने.. (६) हे इंद्र! आप सर्वज्ञाता व दर्शनीय हैं. आप हमारे लिए धन दीजिए. शत्रुओं से भी आप को जो धन मिले, वह हमें दीजिए. (६) तव त्यदिन्द्रियं बृहत्तव दक्षमृत क्रतुम्. वज्र १७ं शिशाति धिषणा वरेण्यम्.. (७) हे इंद्र! आप अपनी विशालता, दक्षता और श्रेष्ठ बुद्धि से यज्ञ और वज्र को तीक्ष्ण बनाते हैं. (७) तव द्यौरिन्द्र पौ १७ं स्यं पृथिवी वर्धति श्रवः. त्वामापः पर्वतासश्च हिन्विरे.. (८) हे इंद्र! स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक से आप के स्वरूप का विस्तार होता है. जल और पर्वत आप को अपना स्वामी मानते हैं. (८) ebook converter DEMO Watermarks*