भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 273, कुल 310 में से

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पृष्ठ 273

त्वां विष्णुर्बृहन्क्षयो मित्रो गृणाति वरुणः. त्वा २३ शर्द्धो मदत्यनु मारुतम्.. (९) हे इंद्र! आप विशाल व आश्रयदाता हैं. विष्णु, मित्र और वरुण आप की स्तुति गाते हैं. मरुद्गण आप को प्रसन्न करते हैं. (९) चौथा खंड नमस्ते अग्न ओजसे गृणन्ति देव कृष्टयः. अमैरमित्रमर्दय.. (१) हे अग्नि! हम बल प्राप्ति के लिए आप को आमंत्रित करते हैं. आप अमित्रों का मर्दन करने की कृपा कीजिए. (१) कुवित्सु नो गविष्टये ऽ ग्ने संवेषिषो रयिम्. उरुक्कृदुरु णस्कृधि.. (२) हे अग्नि! आप महान हैं. आप से हम महानता चाहते हैं. आप हम गौ इच्छुकों को प्रचुर गोधन प्रदान करने की कृपा कीजिए. (२) मा नो अग्ने महाधने परा वगर्भर्भृद्याथा. संवर्ग २३ स २३ रयिं जय.. (३) हे अग्नि! आप हम से विमुख मत होइए. भारवाही जैसे बोझा ढोता है, वैसे ही आप शत्रु समूह से जीते हुए धन को हमारे लिए ढोइए. (३) समस्य मन्यवे विशो विश्वा नमन्त कृष्टयः. समुद्रायेव सिन्धवः.. (४) नदियां जैसे समुद्र की ओर जाती हैं, वैसे ही सारे लोग आप के क्रोध के सामने नत हो जाते हैं. (४) वि चिद्वृत्रस्य दोधतः शिरो बिभेद वृष्णिना. वज्रेण शतपर्वणा.. (५) इंद्र ने अपनी शक्ति से सैकड़ों धार वाले वज्र से वृत्रासुर का सिर काट डाला. वृत्रासुर ने संसार को भयभीत कर रखा था. (५) ओजस्तदस्य तित्विष उभे यत्समवर्तयत्. इन्द्रश्चर्मेव रोदसी.. (६) इंद्र ने अपने ओज से स्वर्गलोक और भूलोक को चमड़ी की तरह धारण कर रखा है. (६) सुमन्मा वस्वी रन्ती सूनरी.. (७) हे इंद्र! आप अच्छे मन वाले, वैभवशाली व रमणीय हैं. (७) सरूप वृषन्ना गहीमौ भद्रौ धुर्यावभि. ताविमा उप सर्पतः.. (८) हे इंद्र! कल्याणकारी सुंदर घोड़ों वाले रथ को धुरी पर चढ़ा कर हमारे पास पहुंचिए. (८) ebook converter DEMO Watermarks*