सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 283, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंउन्नीसवां अध्याय पहला खंड अग्निः प्रत्नेन जन्मना शुम्भानस्तन्व ३ २ स्वाम्. कविर्विप्रेण वावृधे.. (१) हे अग्नि! आप प्रकाशमान व मेधावी हैं. पुराने स्तोत्रों से यजमान आप को प्रज्वलित कर के आप का विस्तार करते हैं. (१) ऊर्जो नपातमा हुवे ऽ ग्निं पावकशोचिषम्. अस्मिन्यज्ञे स्वध्वरे.. (२) हे अग्नि! हम अपने इस यज्ञ में अग्नि को आमंत्रित करते हैं. आप पवित्र व प्रकाशमान हैं. आप ऊर्जा को नीचे नहीं गिरने देते हैं. (२) स नो मित्रमहस्त्वमग्ने शुक्रेण शोचिषा. देवैरा सत्सि बर्हिषि.. (३) हे अग्नि! आप अपनी चमकीली लपटों से अन्य देवताओं के साथ कुश के आसन पर विराजिए. आप हमारे मित्र हैं. (३) उत्ते शुष्मासो अस्थू रक्षो भिन्दन्तो अद्रिवः. नुदस्व याः परिस्पृधः.. (४) हे सोम! पत्थरों से कूट कर आप का रस निकाला जाता है. आप की उमड़ती हुई लहरों से राक्षसों का नाश होता है. जो हम से प्रतिस्पर्धा करते हैं, आप उन शत्रुओं का नाश करने की कृपा कीजिए. (४) अया निजघ्निरोजसा रथसङ्गे धने हिते. स्तवा अभिभ्युषा हृदा.. (५) हे सोम! आप सामर्थ्यवान व शत्रुनाशक हैं, रथ को साथ ले कर शत्रुओं को नष्ट कीजिए. हम हृदय से आप से धन देने के लिए अनुरोध करते हैं. (५) अस्य व्रतानि नाधृषे पवमानस्य दूढ्या. रुज यस्तवा पृतन्यति.. (६) हे सोम! आप पवित्र हैं. आप के दृढ़ व्रतों से दुष्ट राक्षस प्रगति नहीं कर सकते. जो शत्रु युद्ध करना चाहते हैं, आप उन शत्रुओं का नाश कीजिए. (६) त २ हिन्वन्ति मदच्युत २ हरिं नदीषु वाजिनम्. इन्दुमिन्द्राय मत्सरम्.. (७) सोमरस मद बरसाने वाला, स्फूर्तिदायक व हरी कांति वाला है. इंद्र हेतु सोम को नदी के जल से प्रेरित किया जाता है. (७) ebook converter DEMO Watermarks*