सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 39, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंधनादि (सुख) प्रदान कीजिए. (७) सखायस्त्वा ववृमहे देवं मर्तास ऊतये. अपां नपात ॐ सुभग ॐ सुद सम ॐ सुप्रतूर्तिमनेहसम्.. (८) हे अग्नि! आप हमारे सखा हैं. आप श्रेष्ठ कर्म करने वाले हैं. मनुष्य की शीघ्र इच्छा पूर्ति करते हैं. आप धन के स्वामी व जल को धारण करने वाले हैं. हम समान बुद्धि वाले सभी साधक आप से अपने संरक्षण की प्रार्थना करते हैं. (८) सातवां खंड आ जुहोता हविषा मर्चयध्वं नि होतारं गृहपतिं दधिध्वम्. इडस्पदे नमसा रातहव्य ॐ सपर्यता यजतं पस्त्यानाम्.. (१) हे ऋत्विजो (यजमानो)! आप अग्नि देव को आमंत्रित कीजिए. आप सब ओर शुद्धता फैलाने वाली हवि अग्नि देव को प्रदान कीजिए. गृहपति गृह की रक्षा करने वाली अग्नि की स्थापना करें. हवन की चीजों के साथसाथ आप स्तुति कर के उन का स्वागतसत्कार करें. (१) चित्र इच्छिशोस्तरुणस्य वक्षथो न यो मातरावन्वेति धातवे. अनूधा यदजीजनदधा चिदा ववक्षत्सद्यो महि दूत्यां ३ चरन्.. (२) हे अग्नि! बाल एवं तरुण (युवा) रूप आप का हवि पहुंचाना बहुत आश्चर्य वाला है. आप पैदा होने के बाद दूध पीने के लिए अपनी दोनों ही माताओं (पृथ्वी और अरणियों) के पास नहीं जाते, बल्कि अच्छे दूत की भूमिका निभाते हुए देवताओं के पास हवि पहुंचाने जाते हैं. (२) इदं त एकं पर ऊ त एकं तृतीयेन ज्योतिषा सं विशस्व. संवेशनस्तन्वे ३ चारुरेधि प्रियो देवानां परमे जनित्रे.. (३) हे मृत्यु धर्म वाले मनुष्य! अग्नि तुम्हारा एक भाग है. वायु तुम्हारा दूसरा भाग (शरीर) है. सूर्य रूप तीसरे भाग (तेज) से तुम मिलते हो. उन से मुक्त हो कर मुनष्य तेजस्वी रूप प्राप्त करता है. अर्थात् मनुष्य को पावन स्थान में जन्म ले कर देव शक्तियों के लिए प्रिय तथा श्रेष्ठ बनना चाहिए. (पिछले मंत्र में मृत्यु के बाद पुनः प्रकृति में मिलने की क्रिया बताई है). (३) इम ॐ स्तोममर्हते जातवेदसे रथमिव सं महेमा मनीषा. भद्रा हि नः प्रमतिरस्य स ॐ सद्यग्ने सख्ये मा रिषामा वयं तव.. (४) हे अग्नि! आप सब कुछ जानने वाले हैं. हम स्तोत्र रूप को रथ के समान उत्तम बुद्धि से तैयार करते हैं. हे अग्नि! हम आप के मित्र हैं. हमें किसी प्रकार का कोई कष्ट न हो. (४) ebook converter DEMO Watermarks*