भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 41, कुल 310 में से

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पृष्ठ 41

आठवां खंड अबोध्यग्निः समिधा जनानां प्रति धेनुमिवायतीमुषासम्. यह्वा इव प्र वयामुज्जिहानाः प्र भानवः सस्रते नाकमच्छ.. (१) हे अग्नि! आप यजमानों की श्रद्धा से प्रज्वलित हैं. जैसे अग्निहोत्र (सुबह यज्ञ करने वाले) के लिए पाली हुई गाय प्रातःकाल उठ जाती है, वैसे ही प्रातःकाल आप प्रज्वलित होते हैं (किए जाते हैं). पेड़ की फैली हुई शाखाओं के समान आप की किरणें भी दूरदूर तक फैलती हैं. (१) प्र भूर्जयन्तं महां विपोधां मूरैरमूरं पुरां दर्माणम्. नयन्तं गीर्भिर्वना धियं धा हरिश्मश्रुं न वर्मणा धनर्चिम्.. (२) हे अग्नि! आप राक्षसों को जीतने वाले हैं. आप विद्वानों को धारण करने वाले हैं. मूर्खों के आश्रय (स्थान) का नाश करने वाले हैं. आप स्तुति करने वाले को ऐश्वर्य देने वाले हैं. आप कवच के समान रक्षा करने वाले हैं. आप सुनहरी ज्वालाओं वाले हैं. हे मनुष्य! तुम ऐसे अग्नि की आराधना करो. (२) शुक्रं ते अन्यद्यजतं ते अन्यद्विषुरूपे अहनी द्यौरिवासि. विश्वा हि माया अवसि स्वधावन्भद्रा ते पूषन्निह रातिरस्तु.. (३) हे पूषा! आप का तेजस्वी रंग वाला दिन अलग है. उसी तरह काले रंग वाली रात्रि अलग है. आप की महिमा से ये अलगअलग रंग वाले भाग एक ही दिनरात के हैं. आप पोषण करने वाले हैं. आप सारे जग की रक्षा करने वाले हैं. आप कल्याण करने वाले हैं. आप हमारा कल्याण करें. (३) इडामग्ने पुरुद ꣳ स ꣳ सनिं गोः शश्वत्तम ꣳ हवमानाय साध. स्यान्नः सूनुस्तनयो विजावाग्ने सा ते सुमतिर्भूत्वस्मे.. (४) हे अग्नि! आप अनेक कामों में उपयोगी सुमति हमें दीजिए. आप गायों को देने वाली स्तुति हमें दीजिए. आप हमें पुत्रपौत्र प्रदान कीजिए. आप उत्तम बुद्धि वाले हैं. कृपया भली प्रकार आराधना करने वाले यजमान को ये सब प्रदान कीजिए. (४) प्र होता जातो महान्नभोविन्नृषद्मा सीददपां विवर्ते. दधद्यो धायी सुते वया ꣳ सि यन्ता वसूनि विधते तनूपाः.. (५) हे अग्नि! आप सभी घरों में मौजूद रहते हैं. आप बादलों के बीच बिजली के रूप में रहते हैं. इस समय आप यज्ञ में मौजूद हैं. आप महान हैं. आप अंतरिक्ष को जानने वाले हैं. हवि को धारण करने वाले हैं. आप हमें अन्न, धन व संरक्षण प्रदान कीजिए. (५) प्र सम्राजममुरस्य प्रशस्तं पु ꣳ सः कृष्टीनामनुमाद्यस्य. ebook converter DEMO Watermarks*