सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 42, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंइन्द्रस्येव प्र तवसस्कृतानि वन्दद्वारा वन्दमाना विवष्टु.. (६) हे अग्नि! आप बलवान और वीर मनुष्य के स्तुति योग्य हैं. आप बल में इंद्र के समान हैं. आप के इस प्रशंसनीय स्वरूप की स्तुति करते हैं. हे यजमान! स्तुति और आराधना से अग्नि की उपासना करो. (६) अरण्योर्निहितो जातवेदा गर्भ इवेत्सुभृतो गर्भिणीभि:. दिवेदिव ईड्यो जागृवद्भिर्हविष्मद्भिर्मनुष्येभिरग्नि:.. (७) हे अग्नि! आप सब प्रकार के ज्ञान वाले हैं. आप अच्छी तरह गर्भ धारण करने वाली स्त्री के समान अरणियों द्वारा धारण किए जाते हैं. यज्ञ के लिए जागरूक रहने वाले यजमानों द्वारा प्रतिदिन आप वंदनीय हैं. (७) सनादग्ने मृणसि यातुधानान्न त्वा रक्षा ᳪ सि पृतनासु जिग्यु:. अनु दह सहमूरान्क्रव्यादो मा ते हेत्या मुक्षत दैव्याया:.. (८) हे अग्नि! आप हमेशा शत्रुओं को बाधा देने वाले हैं. आप को युद्ध में राक्षस नहीं जीत सकते. आप मांस खाने वाले राक्षसों को अपने तेज से भस्म कर दीजिए. आप के इस हथियार से कोई शत्रु न बचे. (८) नौवां खंड अग्न ओजिष्ठमा भर द्युम्नमस्मभ्यमध्रिगो. प्र नो राये पनीयसे रत्सि वाजाय पन्थाम्.. (१) हे अग्नि! आप हमें खूब बल तथा धन दीजिए. आप बेरोकटोक गति वाले हैं. धन का मार्ग हमें दिखाइए. आप अन्न और बल वाला मार्ग हमें दिखाइए. (१) यदि वीरो अनु ष्यादग्निमिन्धीत मर्त्य:. आजुह्वद्धव्यमानुषक् शर्म भक्षीत दैव्यम्.. (२) हे अग्नि! मनुष्य वीर पुत्र को पाने के लिए आप को प्रज्वलित करे. हवन के पदार्थों से सदा हवन करे. आप की कृपा से सदा परम सुख प्राप्त करे. (२) त्वेषस्ते धूम ऋण्वति दिवि सञ्छुक्र आतत:. सूरो न हि द्युता त्वं कृपा पावक रोचसे.. (३) हे अग्नि! प्रज्वलित होने के बाद आप का धुआं आकाश में फैलता है. बादल रूप में बदल जाता है. आप पवित्र करने वाले हैं. स्तुति के प्रभाव से आप सूर्य के समान प्रकाशित होते हैं. (३) त्व ᳪ हि क्षैतवद्यशो ऽ ग्ने मित्रो न पत्यसे. ebook converter DEMO Watermarks*