सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 43, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंत्वं विचर्षणे श्रवो वसो पुष्टिं न पुष्यसि.. (४) हे अग्नि! निश्चय ही आप सूखी समिधा रूप में अन्न को ग्रहण करते हैं. आप उसे (अन्न को) बहुत ज्यादा मात्रा में बढ़ाते हैं (पुष्ट करते हैं). आप सूर्य के समान तेजस्वी हैं. आप सभी को शरण (आश्रय) देने वाले व सब कुछ देखने वाले हैं. (४) प्रातरग्निः पुरुप्रियो विश स्तवेतातिथिः. विश्वे यस्मिन्नमर्त्ये हव्यं मर्तास इन्धते.. (५) हे अग्नि! आप अनेक लोगों को प्रिय लगने वाले हैं. आप यजमानों के घर धन स्थापित करने वाले हैं. आप यजमानों के घर मेहमान के समान आने वाले हैं. आप प्रातःकाल स्तुति किए जाने वाले हैं. आप अमर हैं. सभी मनुष्य आप को पवित्र हवन सामग्री प्रदान करें. (५) यद्वाहिष्ठं तदग्नये बृहदर्च विभावसो. महिषीव त्वद्रयिस्त्वद्वाजा उदीरते.. (६) हे अग्नि! शीघ्र पहुंचने वाले स्तोत्र से हम आप की आराधना करते हैं. आप तेजस्वी हैं. हमें बहुत सा अन्न और धन प्रदान कीजिए क्योंकि आप ही से बहुत सा धन और अन्न प्राप्त होता है. (६) विशोविशो वो अतिथिं वाजयन्तः पुरुप्रियम्. अग्निं वो दुर्यं वचः स्तुषे शूषस्य मन्मभिः.. (७) हे यजमानो! आप अन्न और बल की इच्छा करते हुए अग्नि की स्तुति करो. वे सब के प्रिय व पूजनीय हैं. हे अग्नि! हम गृहपति आप की सुखदायी स्तोत्रों से आराधना करते हैं. (७) बृहद्वयो हि भानवे ऽ र्चा देवायाग्नये. यं मित्रं न प्रशस्तये मर्तासो दधिरे पुरः.. (८) हे अग्नि! आप तेजस्वी हैं. आप के लिए बहुत सा हवि का अन्न दिया जाता है. हम प्रकाश वाले आप की पूजा करते हैं. हम आप को मित्र के समान मानते हैं. हम उत्तम स्तुति करने के लिए आप को आगे कर के स्थापित करते हैं. (८) अगन्म वृत्रहन्तमं ज्येष्ठमग्निमानवम्. यः स्म श्रुतर्वन्नार्क्षे बृहदनीक इध्यते.. (९) हे अग्नि! आप पापों का नाश करने वाले व प्रशंसनीय मनुष्यों के हितकारी हैं. ऋक्ष पुत्र श्रुतर्वा के लिए हम बड़ीबड़ी ज्वालाओं के साथ आप को प्रकट करते हैं. (९) जातः परेण धर्मणा यत्सवृद्धिः सहाभुवः. पिता यत्कश्यपस्याग्निः श्रद्धा माता मनुः कविः.. (१०) ebook converter DEMO Watermarks*