भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 44, कुल 310 में से

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पृष्ठ 44

हे अग्नि! कश्यप आप के पिता और श्रद्धा माता हैं. मनु कवि हैं. आप श्रेष्ठ कर्मों द्वारा शुरू किए गए यज्ञ में प्रकट होते हैं. (१०) दसवां खंड सोम २४ राजानं वरुणमग्निमन्वारभामहे. आदित्यं विष्णु २४ सूर्य ब्रह्माणं च बृहस्पतिम्.. (१) हम सोम, राजा, वरुण, अग्नि, अदिति के पुत्र, विष्णु, सूर्य एवं ब्रह्मा को बारबार याद करते हुए आमंत्रित करते हैं. अर्थात् इन सभी देवताओं को स्तुतियों से आमंत्रित करते हैं. (१) इत एत उदारुहन्दिवः पृष्यान्त्या रुहन्. प्र भूर्जयो यथा पथोद्द्यामङ्गिरसो ययुः.. (२) यज्ञ करने वाले आंगिरस ऋषि स्वर्गलोक को पहुंचे. उसी के प्रभाव से और भी ऊपर गए. (२) राये अग्ने महे त्वा दानाय समिधीमहि. ईडिष्वा हि महे वृषं द्यावा होत्राय पृथिवी.. (३) हे अग्नि! हम बहुत धन दान के लिए आप को प्रदीप्त करते हैं. आप वरदान की वर्षा करने वाले हैं. महान यज्ञ के लिए स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक की स्तुति करते हैं. (३) दधन्वे वा यदीमनु वोचद्ब्रह्मेति वेरु तत्. परि विश्वानि काव्या नेमिश्चक्रमिवाभुवत्.. (४) हे अग्नि! आप को संबोधित कर के अध्वर्यु आदि पुरोहित स्तोत्र उचारते हैं. आप सब कुछ जानते हैं. आप सब कर्मों को वैसे ही वश में रखते हैं, जैसे पहिए गाड़ी को. (४) प्रत्यग्ने हरसा हरः शृणाहि विश्वतस्परि. यातुधानस्य रक्षसो बलं न्युब्जवीर्यम्.. (५) हे अग्नि! आप अपने तेज से यातना देने वाले राक्षसों को सब ओर (प्रकार) से नष्ट कर दीजिए. (५) त्वमग्ने वसू २४ रिह रुद्राँ आदित्याँ उत. यजा स्वध्वरं जनं मनुजातं घृतप्रुषम्.. (६) हे अग्नि! आप यहां वसु, रुद्र एवं आदित्य देवता के लिए यज्ञ कीजिए. आप उत्तम यज्ञ करने वाले, घी से सींचने वाले, मनु से उत्पन्न हुए मनुष्य का सत्कार (मनोकामना सिद्धि द्वारा) कीजिए. (६)