भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 45, कुल 310 में से

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पृष्ठ 45

ग्यारहवां खंड पुरु त्वा दाशिवाँ वोचे ऽ रिरग्ने तव स्विदा. तोदस्येव शरण आ महस्य.. (१) हे अग्नि! आप को बहुत सी हवि प्रदान करते हुए मैं उसी तरह आप की शरण में आया हूं, जैसे बहुत धनवान की शरण में सेवक आते हैं. (१) प्र होत्रे पूर्व्यं वचो ऽ ग्नये भरता बृहत्. विपां ज्योती २४ षि बिभ्रते न वेधसे.. (२) हे स्तुति करने वालो! अग्नि ज्ञानियों के तेज को धारण करने वाले हैं. विधाता आदि देवों को बुलाने वाले हैं. आप इन के लिए महान और प्राचीन स्तोत्र का पाठ कीजिए. (२) अग्ने वाजस्य गोमत ईशानः सहसो यहो. अस्मे देहि जातवेदो महि श्रवः.. (३) हे अग्नि! आप बल से उत्पन्न हुए हैं. आप अन्न के स्वामी व अंतर्यामी हैं. आप हमें बहुत सा अन्नधन दीजिए. (३) अग्ने यजिष्ठो अध्वरे देवां देवयते यज. होता मन्द्रो वि राजस्यति स्रिधः.. (४) हे अग्नि! आप यज्ञ में पूजनीय हैं. यजमान के लिए देवताओं का यजन कीजिए. देवों को बुलाने वाले आप शत्रुओं को हरा कर शोभायमान होते हैं. (४) जज्ञानः सप्त मातृभिर्मेधामाशासत श्रिये. अयं ध्रुवो रयीणां चिकेतदा.. (५) हे अग्नि! आप सात माताओं की सहायता से उत्पन्न होने वाले हैं. आप सोम को सेवा कार्य में शोभित करते हैं (प्रेरित करते हैं). सोम कर्म का विधान करने वाले हैं. आप धनसंपदा को अच्छी तरह जानने वाले हैं. (५) उत स्या नो दिवा मतिरदितिरूत्यागमत्. सा शन्ताता मयस्करदप स्रिधः.. (६) हे अदिति! आप स्तुति के योग्य हैं. आप अपने पूरे रक्षा साधनों के साथ हमारे पास पधारें. हमें सुखशांति प्रदान करें. हमारे शत्रुओं को दूर करें. (६) ईडिष्वा हि प्रतीव्यां ३ यजस्व जातवेदसम्. चरिष्णुधूममगृभीतशोचिषम्.. (७) हे स्तुति करने वालो! शत्रुओं को भस्म करने (हराने) वाले अग्नि की स्तुति करो. इन का धुआं सब ओर घूम सकता है. इन के प्रकाश को कोई नहीं रोक सकता. ये सब कुछ जानने वाले हैं. आप हवि से इन की आराधना कीजिए. (७) ebook converter DEMO Watermarks*