सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 46, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंन तस्य मायया च न रिपुरीशीत मर्त्यः. यो अग्नये ददाश हव्यदातये.. (८) हे अग्नि! जो आप के लिए हवि पदार्थ देता है, उस पर कभी भी किसी दुष्ट (शत्रु) के छलकपट का असर नहीं होता है. (८) अप त्यं वृजिन २४ रिपु २४ स्तेनमग्ने दुराध्यम्. दविष्ठमस्य सत्पते कृधी सुगम्.. (९) हे अग्नि! आप छलीकपटी शत्रु को बहुत दूर फेंक दीजिए. आप सत्य के पालनहार हैं. हमारे लिए सुखशांति का मार्ग सुगम बनाइए. (९) श्रुष्ट्यग्ने नवस्य मे स्तोमस्य वीर विष्पते. नि मायिनस्तपसा रक्षसो दह.. (१०) हे अग्नि! आप वीर हैं. हमारी इन नई प्रार्थनाओं को सुन कर छली, दुष्ट राक्षसों को अपने ताप से भस्म कीजिए. राक्षस हमारे कर्मों में विघ्न डालते हैं. (१०) बारहवां खंड प्र म २४ हिष्ठाय गायत ऋताव्ने बृहते शुक्रशोचिषे. उपस्तुतासो अग्नये.. (१) हे स्तुति करने वालो! अग्नि यज्ञ व सत्य के पालनहार हैं. वे महान तेज वाले हैं. आप ऐसे महान रक्षक अग्नि की स्तुति कीजिए. (१) प्र सो अग्ने तवोतिभिः सुवीराभिस्तरति वाजकर्मभिः. यस्य त्व २४ सख्यमाविथ.. (२) हे अग्नि! आप जिन यजमानों के मित्र हो जाते हैं, वे अन्नबल की रक्षा करने वाली श्रेष्ठ संतान प्राप्त करते हैं. (२) तं गूर्धया स्वर्णरं देवासो देवमरतिं दधन्विरे. देवत्रा हव्यमूहिषे.. (३) हे स्तुति करने वालो! स्वर्ग में देवताओं तक हवि पहुंचाने वाले अग्नि की स्तुति करो. आप जिस देवता को इष्ट मान कर पूजते हैं, आप की हवि अग्नि उस देवता तक पहुंचा देते हैं. (३) मा नो हृणीथा अतिथिं वसुरग्निः पुरुप्रशस्त एषः. यः सुहोता स्वध्वरः.. (४) अग्नि यज्ञ में मेहमान की तरह हैं. उन्हें यज्ञ से दूर मत ले जाओ. वे देवताओं को बुलाने वाले हैं. वे सुखशांति देने वाले हैं. वे अनेक लोगों द्वारा पूजित व सब को बसाने वाले हैं. (४) भद्रो नो अग्निराहुतो भद्रा रातिः सुभग भद्रो अध्वरः. भद्रा उत प्रशस्तयः.. (५) हे अग्नि! आप को हवियों से तृप्त किया है. आप हमारा कल्याण कीजिए. आप ऐश्वर्यशाली हैं. हमें शुभ धन प्रदान कीजिए. हमें कल्याणकारी यज्ञ प्राप्त कराइए. हमारी प्रार्थनाएं हमारे लिए मंगलमयी हों. (५) ebook converter DEMO Watermarks*