भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 47, कुल 310 में से

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पृष्ठ 47

यजिष्ठं त्वा ववृमहे देवं देवत्रा होतारममर्त्यम्. अस्य यज्ञस्य सुक्रतुम्.. (६) हे अग्नि! आप देवों में श्रेष्ठ हैं. आप श्रेष्ठ यज्ञ कराने वाले हैं. आप अमर हैं. इस यज्ञ को अच्छी तरह पूरा करने वाले हैं. हम आप की स्तुति करते हैं. (६) तदग्ने द्युम्नमा भर यत्सासाह सदने कं चिदत्रिणम्. मन्युं जनस्य दूढ्यम्.. (७) हे अग्नि! आप हमें तेजस्वी बनाइए. आप हमें यश प्रदान कीजिए. यज्ञ में विघ्न पहुंचाने वाले दुष्टों को हम वश में कर सकें. उन का तिरस्कार कर सकें. आप दुर्बुद्धि वाले लोगों की बुद्धि ठीक कीजिए. आप उन के क्रोध को दूर कीजिए. (७) यद्वा उ विशपतिः शितः सुप्रीतो मनुषो विशे. विश्वेदग्निः प्रति रक्षा ꣲ सि सेधति.. (८) हे अग्नि! आप यजमानों के पालनहार हैं. हवियों से तृप्त और प्रसन्न होने पर आप जब तक मनुष्यों के घर रहते हैं तब तक उन के सभी कष्ट दूर करते हैं. यह बात जग प्रसिद्ध है. (८)

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