सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 61, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंविष्णु के वामन अवतार ने तीन पैरों से विश्व को नाप लिया. उन के धूल से भरे चरणों के नापे गए स्थान में सारा जग समाया. (९) बारहवां खंड अतीहि मन्युषाविण २४ सुषुवा २४ समुपेरय. अस्य रातौ सुतं पिब.. (१) हे इंद्र! जो यजमान क्रोधित हो कर सोमरस निचोड़े, आप उसे स्वीकार मत कीजिए. जो अच्छे विधिविधान से सोमरस निचोड़े, आप उसी के यज्ञ में सोमरस ग्रहण कीजिए. (१) कदु प्रचेतसे महे वचो देवाय शस्यते. तदिद्ध्यस्य वर्धनम्.. (२) हे इंद्र! आप महान हैं. आप की कृपा से हमारी मामूली प्रार्थना भी प्रशंसा पाती है. हमारी ये प्रार्थनाएं भी आप का गुणगान करती हैं. अतः यजमान पर आप की कृपा होती है. (२) उक्थं च न शस्यमानं नागो रयिरा चिकेत. न गायत्रं गीयमानम्.. (३) स्तुति न करने वाले इंद्र के शत्रु हैं. इंद्र यजमानों द्वारा पढ़े गए स्तोत्रों को अच्छी तरह जानते हैं. इंद्र पुरोहित के गाए गए साम को भी जानते व समझते हैं. हम इंद्र की स्तुति करते हैं. (३) इन्द्र उक्थेभिर्मन्दिष्ठो वाजानां च वाजपतिः. हरिवांत्सुताना २४ सखा.. (४) हे इंद्र! आप शक्तिशालीयों में सब से ज्यादा शक्तिशाली हैं. आप हरि नामक घोड़े वाले हैं. आप प्रार्थनाओं से बहुत प्रसन्न होते हैं. आप सोमरस से मित्र के समान स्नेह रखने की कृपा करें. (४) आ याह्युप नः सुतं वाजेभिर्मा हृणीयथाः. महाँ इव युवजानिः.. (५) हे इंद्र! जिस प्रकार युवा स्त्री (पत्नी) वाला पुरुष किसी दूसरी स्त्री पर नजर नहीं डालता, उसी प्रकार आप भी औरों की हवि पर नजर मत डालिए (मत ललचाइए). आप हमारे ही सोम यज्ञ में पधार कर हवि ग्रहण करने की कृपा करें. (५) कदा वसो स्तोत्र २४ हर्यत आ अव श्मशा रुधद्द्वाः. दीर्घ २४ सुतं वाताप्याय.. (६) हे इंद्र! आप सब ओर व्यापक हैं. बनाई गई नहर में जल रोकने की तरह हम सोमरस तैयार कर के आप को भेंट करने के लिए कब रोकें. (६) ब्राह्मणादिन्द्र राधसः पिबा सोममृतू २४ रनु. तवेद २४ सख्यमस्तृतम्.. (७) हे इंद्र! ब्राह्मण यजमान से सोमरस पीजिए. आप मौसम के अनुसार सोमरस पीजिए. आप का और हमारा अटूट नाता है. (७) ebook converter DEMO Watermarks*