भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 76, कुल 310 में से

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पृष्ठ 76

अशस्तिहा जनिता वृत्रतूरसि त्वं तूर्य तरुष्यतः.. (९) हे इंद्र! आप युद्धों में शत्रुओं का नाश करते हैं. आप शत्रुओं को बाधा पहुंचाने वाले हैं. आप प्राकृतिक विपत्तियों का नाश करने वाले हैं. आप हमारे शत्रुओं के लिए आपत्तियां पैदा करने वाले हैं. आप दुष्टों के नाशक हैं. (९) प्र यो रिरिक्ष ओजसा दिवः सदोभ्यस्परि. न त्वा विव्याच रज इन्द्र पार्थिवमति विश्वं ववक्षिथ.. (१०) हे इंद्र! स्वर्गलोक में आप की प्रतिष्ठा है. पूरी पृथ्वी का कणकण भी आप को घेर नहीं सकता, व्याप्त नहीं कर सकता. आप पूरे संसार को व्याप्त करने में समर्थ हैं. (१०) नौवां खंड असावि देवं गोऋजीकमन्धो न्यस्मिन्निन्द्रो जनुषेमुवोच. बोधामसि त्वा हर्यश्व यज्ञैर्बोधा न स्तोममन्धसो मदेषु.. (१) हम ने तेजस्वी गाय के दूध से सोमरस तैयार किया है. ऐसा सोमरस इंद्र को स्वभाव से ही बहुत पसंद आता है. आप इस सोमरस को पी कर मस्त हो जाइए, प्रसन्न हो जाइए. हमारी प्रार्थनाओं पर खासतौर से ध्यान देने की कृपा कीजिए. (१) योनिष्ट इन्द्र सदने अकारि तमा नृभिः पुरुहूत प्र याहि. असो यथा नो ऽ विता वृधश्चिद्दो वसूनि ममदश्व सोमैः.. (२) हे इंद्र! आप को बैठाने के लिए हम ने खास यज्ञ वेदिका तैयार की है. आप मरुतों के साथ पधारिए. आप सब उस स्थान पर विराजिए. आप हमारे रक्षक व हमारे पालक हैं. आप हमें कई तरह के धन दीजिए. आप सोमरस पी कर प्रसन्न होइए. (२) अदर्दुरुत्समसृजो वि खानि त्वमर्णवान्बद्धधानाँ अरम्णाः. महान्तमिन्द्र पर्वतं वि यद्वः सृजद्धारा अव यद्दानवान्हन्.. (३) हे इंद्र! आप ने बादलों का जल निकालने के लिए खासतौर पर दरवाजों को (रास्तों को) बनाया है, जिस से बादलों को भेद कर पानी पाया जा सके. आप पानी के रास्ते की सब बाधाओं को दूर करते हैं. आप की कृपा से बहुत जल धाराएं बही हैं. आप ने राक्षसों का नाश किया है. (३) सुष्वाणास इन्द्र स्तुमसि त्वा सनिष्यन्तश्चित्त्विनृम्ण वाजम्. आ नो भर सुवितं यस्य कोना तना त्मना सह्याम त्वोताः.. (४) हे इंद्र! आप बहुत धन देने वाले हैं. सोमरस निचोड़ने वाले यमराज आप की स्तुति करते हैं. पुरोडाश पकाने वाले यजमान आप की स्तुति करते हैं. आप हमें हमारा चाहा गया धन दीजिए. हम आप से शक्ति पा कर बहुत धन पाते हैं. (४) ebook converter DEMO Watermarks*

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित) · पृष्ठ 76, कुल 310 में से · BharatKosha