सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 78, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंअव द्रप्सो अ ँ शुमतीमतिष्ठदियानः कृष्णो दशभिः सहस्रैः. आवत्तमिन्द्रः शच्या धमन्तमप स्नेहितिं नृमणा अधद्राः.. (१) इंद्र सभी को प्रिय हैं. उन्होंने शत्रुओं द्वारा आक्रमण किए जाने पर उन पर फिर से आक्रमण कर के उन की सेना को हरा दिया. उन्होंने कृष्णासुर को भी हराया. कृष्णासुर बहुत तीव्र गति वाला था. उस ने दस हजार सैनिकों को साथ ले कर उन पर हमला किया था. कृष्णासुर सभी के लिए दुःखदायक था. अंशुमती (नदी) के तट पर उस ने सभी को (आकृष्ट कर के) अपने चंगुल में फंसा लिया था. उन्होंने इतने शक्तिमान कृष्णासुर को भी हरा दिया. (१) वृत्रस्य त्वाश्वसथादीषमाणा विश्वे देवा अजहुर्ये सखायः. मरुद्भिरिन्द्र सख्यं ते अस्त्वथेमा विश्वाः पृतना जयासि.. (२) हे इंद्र! सभी सहायक देवतागण वृत्रासुर से डर कर आप का साथ छोड़ कर भाग गए (चले गए). उन सब के चले जाने पर आप ने मरुद्गणों की मित्रता के कारण उन के सहयोग से दुश्मनों की सेना को हराया. (२) विधुं दद्राण ँ समने बहूनां युवान ँ सन्तं पलितो जगार. देवस्य पश्य काव्यं महित्वाद्या ममार स ह्यः समान.. (३) हे यजमानो! इंद्र युद्ध में वीरता दर्शाते हैं. वे शत्रुओं की सेना को हराने वाले हैं. उन की कृपा (प्रभाव) से बूढ़ा भी जवान हो जाता है. आप उन की काव्य महिमा देखिए, जो आज मरी हुई सी लगने पर भी कल फिर जी जाती है अर्थात् उन की महिमा अमित है. (३) त्व ँ ह त्यत्सप्तभ्यो जायमानो ऽ शत्रुभ्यो अभवः शत्रुरिन्द्र. गूढे द्यावापृथिवी अन्वविन्दो विभुमद्ग्यो भुवनेभ्यो रणं धाः.. (४) हे इंद्र! आप का कोई शत्रु उत्पन्न नहीं हुआ है अर्थात् आप अजातशत्रु हैं. आप उत्पन्न होते ही वृत्रासुर आदि छह राक्षसों के दुश्मन हो गए. अपने अंधकार से स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक को बचाया. आप ने दोनों लोकों को प्रकाश युक्त बनाया. आप ने ही दोनों लोकों को स्थिरता दी. आप ने ही दोनों लोकों को सुंदर बनाया. (४) मेदिं न त्वा वज्रिणं भृष्टिमन्तं पुरुधस्मानं वृषभ ँ स्थिरप्स्नुम्. करोष्यर्यस्तरषीर्दुवस्युरिन्द्र द्युक्षं वृत्रहणं गृणीषे.. (५) हे यजमानो! अच्छे कर्मों के कारण सभी जगह इंद्र की सराहना होती है. वे वृत्रासुर व शत्रुविनाशक हैं. उन की स्वर्गलोक में प्रतिष्ठा है. वे बलवान हैं. वे युद्धों में स्थिर रहते हैं. वे वज्रधारी और दुष्टनाशक हैं. वे विजयदाता हैं. हम भी उन की महिमा की सराहना करते हैं. (५) प्र वो महे महे वृधे भरध्वं प्रचेतसे प्र सुमतिं कृणुध्वम्. ebook converter DEMO Watermarks*