सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 79, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंविशः पूर्वीः प्र चर चर्षणिप्राः.. (६) हे यजमानो! इंद्र महान कार्य करने वाले और प्रसिद्ध हैं. आप उन को सोमरस चढ़ाते समय उत्तम स्तोत्रों से उन की उपासना कीजिए. वे उपासकों की इच्छा पूरी करते हैं. वे उपासकों का कल्याण करते हैं. (६) शुन ॐ हुवेम मघवानमिन्द्रमस्मिन्भरे नृतमं वाजसातौ. शृण्वन्तमुग्रमूतये समत्सु घ्नन्तं वृत्राणि सञ्जितं धनानि.. (७) हे यजमानो! इंद्र अन्नदाता, उत्साही, वैभववान व उत्तम वीर हैं. वे हमारी प्रार्थना को बहुत गौर से सुनते हैं. वे शत्रुओं के संचित धन को जीत लेते हैं. वे शत्रुनाशक हैं. हम उन की सहायता चाहते हैं. हम इसलिए उन का आह्वान करते हैं. (७) उदु ब्रह्माण्यैरत श्रवस्येन्द्र ॐ समर्ये महया वसिष्ठ. आ यो विश्वानि श्रवसा ततानोपश्रोता म ईवतो वचा ॐ सि.. (८) हे वसिष्ठ (ऋषि)! आप इंद्रियों को जीतने वाले हैं. वे यशवर्द्धक हैं. वे उपासकों की प्रार्थना ध्यान से सुनते हैं. हम उन से अन्न चाहते हैं. आप यज्ञ में उन की महिमा वर्णित करने वाली प्रार्थनाएं पढ़ने की कृपा कीजिए. (८) चक्रं यदस्याप्स्वा निषत्तमुतो तदस्मै मध्विच्चच्छद्यात्. पृथिव्यामदिशितं यदूधः पयो गोष्वदधा ओषधीषु.. (९) हे यजमानो! इंद्र अंतरिक्ष में देदीप्यमान हैं. वे अपने वज्र से यजमानों के लिए मीठा जल भेजते हैं (बरसाते हैं). वही जल पृथ्वी पर गायों में दूध और ओषधियों में गुणकारी रस के रूप में हम सभी को प्राप्त होता है. (९) ग्यारहवां खंड त्यमू षु वाजिनं देवजूत ॐ सहोवानं तरुतार ॐ रथानाम्. अरिष्टनेमिं पृतनाजमाशु ॐ स्वस्तये तार्क्ष्यमिहा हुवेम.. (१) हे यजमानो! हम अपने कल्याण के लिए तार्क्ष्य (गरुड़) का आह्वान करते हैं. वे देवदूत और बलवान हैं. वे युद्धों में हमारा भला कर सकते हैं. वे शत्रुजित् व अबाध गति वाले हैं. वे बहुत तेज गति से उड़ने में समर्थ हैं. (१) त्रातारमिन्द्रमवितारमिन्द्र ॐ हवेहवे सुहव ॐ शूरमिन्द्रम्. हुवे नु शक्रं पुरुहूतमिन्द्रमिद ॐ हविर्मघवा वेत्विन्द्रः.. (२) हे यजमानो! हम अपने कल्याण के लिए इंद्र का आह्वान करते हैं. वे हमारे त्राता (रक्षक), सहायक, शक्तिशाली व सक्षम हैं. वे बहुत से उपासकों द्वारा स्तुत्य (उपासना योग्य) और धनवान हैं. वे हवि के अन्न को ग्रहण करने की कृपा करें. (२) ebook converter DEMO Watermarks*