भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 80, कुल 310 में से

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पृष्ठ 80

यजामह इन्द्रं वज्रदक्षिणं ꣳ हरीणा ꣳ रथ्यां ३ विव्रतानाम्. प्र श्मश्रुभिर्दोघुवदूर्ध्वधा भुवद्दि सेनाभिर्भयमानो वि राधसा.. (३) हे यजमानो! इंद्र हाथ में वज्र धारण करते हैं. वे वेगशील हैं. वे रथ पर विराजमान हैं. वे अपनी दाढ़ीमूंछों से शत्रु को डराने वाले व उपासकों को धनवैभव प्रदान करने वाले हैं. (३) सत्राहणं दाधृषिं तुग्रमिन्द्रं महामपारं वृषभ ꣳ सुवज्रम्. हन्ता यो वृत्र ꣳ सनितोत वाजं दाता मघानि मघवा सुराधा:.. (४) हे यजमानो! इंद्र शत्रुओं के जत्थों के नाशक हैं. उन्हें भयभीत करने वाले हैं. इंद्र बहुत शक्तिमान हैं. वे वज्रधारी, वृत्रनाशक, अन्नदाता व यजमानों को धन देने वाले हैं. (४) यो नो वनुष्यन्नभिदाति मर्त उगणा वा मन्यमानस्तुरो वा. क्षिधी युधा शवसा वा तमिन्द्राभी ष्याम वृषमणस्त्वोता:.. (५) हे इंद्र! आप हमारी रक्षा कीजिए. आप की कृपा से हम शत्रुओं को हरा सकें. हम शत्रुओं को मारने के इच्छुक हैं. हम मारक अस्त्रशस्त्र के साथ आक्रमण करने के लिए तैयार हैं. हम दृढ़ निश्चय वाले हैं. (५) यं वृत्रेषु क्षितयः स्पर्धमाना यं युक्तेषु तुरयन्तो हवन्ते. य ꣳ शूरसातौ यमपामुपज्मन्पं विप्रासो वाजयन्ते स इन्द्र:.. (६) हे इंद्र! यजमान युद्ध में सहायता के लिए आप को पुकारते हैं. आप उन की पुकार सुनते हैं. आप अस्त्रशस्त्र वाले योद्धाओं के बुलाने पर उन की सहायता करते हैं. जल वर्षा के लिए आप से ही निवेदन किया जाता है. ब्राह्मणगण आप को ही हवि समर्पित करते हैं. (६) इन्द्रापर्वता बृहता रथेन वामीरिष आ वहत ꣳ सुवीरा:. वीत ꣳ हव्यान्यध्वरेषु देवा वर्धेथां गीर्भिरिडया मदन्ता.. (७) हे इंद्र! आप पर्वतवासी, विशाल रथ वाले एवं उपासना योग्य हैं. अच्छी संतान वाले यजमान आप को हवि भेंट करते हैं. आप उस हवि का भोग लगाते हैं. आप उस हवि से प्रसन्न होते हैं. आप हमारी प्रार्थनाओं से और यशस्वी बनिए. आप हमें अन्न प्रदान करने की कृपा कीजिए. (७) इन्द्राय गिरो अनिशितसर्गा अपः प्रेरयत्सगरस्य बुध्नात्. यो अक्षेणेव चक्रियौ शचीभिर्विष्वक्तस्तम्भ पृथिवीमुत द्याम्.. (८) हे इंद्र! आप ने अपने सामर्थ्य से स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक को उसी तरह घेर रखा है, जैसे लोहे की पट्टी चारों ओर से पहिए को घेरे रखती हैं. हमारी प्रार्थनाएं अंतरिक्ष से जल बरसाने की सामर्थ्य रखती हैं. (८) आ त्वा सखायः सख्या ववृत्युस्तिरः पुरू चिदर्णवां जगम्या:. ebook converter DEMO Watermarks*