सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 81, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंपितुर्नपातमा दधीत वेधा अस्मिन्क्षये प्रतरां दीद्यानः.. (९) हे इंद्र! आप अंतरिक्षलोक में मौजूद हैं. हम आप के मित्र हैं. हम उत्तम प्रार्थनाओं से आप का आह्वान करते हैं. आप के प्रभाव और कृपा से हमें पुत्र और पौत्रों की प्राप्ति हो. (९) को अद्य युङ्क्ते धुरि गा ऋतस्य शिमीवतो भामिनो दुर्हृणायून्. आसन्नेषामप्सुवाहो मयोभून्य एषां भृत्यामृणधत्स जीवात्.. (१०) हे इंद्र! आप के अलावा आप के रथ में इन घोड़ों को जोत सकने की किस की सामर्थ्य है? आप के घोड़े रथ की धुरी की सहायता से गति पाते हैं, क्षमतावान हैं. आप शत्रुओं पर क्रोध करने वाले व सुखदायी हैं. आप के घोड़ों का भृत्य (भरणपोषण करने वाला) ही जीवन धारण करता है. (१०) बारहवां खंड गायन्ति त्वा गायत्रिणो ऽ र्चन्त्यर्कमर्किणः. ब्रह्माणस्त्वा शतक्रत उद्वंशमिव येमिरे.. (१) हे इंद्र! आप सैकड़ों कर्म करने वाले हैं. गाने वाले आप के गुण गाते हैं. मंत्रों से आप का आह्वान करते हैं. ब्रह्मा नामक ऋत्विक् वैसे ही स्वर साध कर आप की उपासना करते हैं, जैसे बांस के ऊपर नट अपनेआप को साधते हैं. (१) इन्द्रं विश्वा अवीवृधन्थ्समुद्रव्यचसं गिरः. रथीतमं रथीनां वाजानां सत्पतिं पतिम्.. (२) हे इंद्र! आप श्रेष्ठ रथ पर विराजमान हैं. आप श्रेष्ठ योद्धा, अन्न व बल के स्वामी हैं. आप सज्जनों के रक्षक हैं. हमारी सारी प्रार्थनाएं आप का गुणगान करती हैं. (२) इममिन्द्र सुतं पिब ज्येष्ठममर्त्यं मदम्. शुक्रस्य त्वाभ्यक्षरन्धारा ऋतस्य सादने.. (३) हे इंद्र! आप अमर व प्रसन्नतादायी हैं. सदन में परिष्कृत सोमरस आप की ओर बढ़ रहा है. आप उसे स्वीकारने की कृपा कीजिए. (३) यदिन्द्र चित्र म इह नास्ति त्वादातमद्रिवः. राधस्तन्नो विदद्वस उभयाहस्त्या भर.. (४) हे इंद्र! आप धनवान व विलक्षण हैं. हमारे पास ऐसा कोई धन नहीं है, जो हम आप को भेंट कर सकें. आप खुले हाथों से हमें भरपूर धन प्रदान करने की कृपा कीजिए. (४) श्रुधी हवं तिरश्च्या इन्द्र यस्त्वा सपर्यति. सुवीर्यस्य गोमतो रायस्पूर्धि महां असि.. (५)