भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 84, कुल 310 में से

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पृष्ठ 84

इन्द्रं विश्वासाहं नर ॐ शचिष्ठं विश्ववेदसम्.. (६) हे इंद्र! आप यजमानों के हितकारी, अन्न व बल के स्वामी, शत्रुजित्, यज्ञ के स्वामी, शक्तिनायक एवं सर्वज्ञ हैं. हम आप की उपासना करते हैं. (६) दधिक्राव्णो अकारिषं जिष्णोरश्वस्य वाजिन:. सुरभि नो मुखा करतप्र ण आयू ॐ षि तारिषत्.. (७) हे यजमानो! हम दधिक्राव (ऋषि) की उपासना करते हैं. दधिक्राव (ऋषि) विजेता, घोड़े के समान गतिशील व शरीर को पोषण देने वाले एवं हमारी आयु में बढ़ोतरी करने वाले हैं. (७) पुरां भिन्दुर्यवा कविरमितौजा अजायत. इन्द्रो विश्वस्य कर्मणो धर्ता वज्री पुरुष्टुतः.. (८) इंद्र शत्रुओं की नगरियों को ध्वस्त करने वाले एवं जवान हैं. वे कवि, शक्तिमान, विश्वपालक, वज्रधारी एवं अग्रगण्य हैं. (८) दूसरा खंड प्रप्र वस्त्रिष्टुभमिषं वन्दद्गीरायेन्दवे. धिया वो मेधसातये पुरन्ध्या विवासति.. (१) हे यजमानो! आप वीर इंद्र को हवि प्रदान करो. वे यज्ञ को पूरा करने में बुद्धि से किए गए श्रेष्ठ कार्यों की प्रशंसा व मनोकामनाएं पूरी करते हैं. वे यजमानों का सम्मान करते हैं. (१) कश्यपस्य स्वर्विदो यावाहुः सयुजाविति. ययोर्विश्वमपि व्रतं यज्ञं धीरा निचाय्य.. (२) इंद्र के घोड़े अपनेआप को जानने वाले व सर्वज्ञ हैं. ये घोड़े इंद्र को यज्ञ में ले जाने में लगे रहते हैं. विद्वान् कहते हैं कि यज्ञ में जाने का निश्चय होते ही ये घोड़े अपनेआप रथ में जुत जाते हैं. (२) अर्चत प्रार्चत नरः प्रियमैधासो अर्चत. अर्चन्तु पुत्रका उत पुरमिद् धृष्णवर्चत.. (३) हे यजमानो! इंद्र आप को अपनी कृपा से ऐसी संतान प्रदान करते हैं, जो यज्ञ में रुचि रखती हों. वे यजमानों की आकांक्षा पूरी करते हैं. वे शत्रुजित् हैं. आप सभी इंद्र की अर्चना कीजिए. (३) उक्थमिन्द्राय श ॐ स्यं वर्धनं पुरुनिष्षिधे. शक्रो यथा सुतेषु नो रारणत्सख्येषु च.. (४) ebook converter DEMO Watermarks*

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