भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 95, कुल 310 में से

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पवस्व सोम महान्त्समुद्रः पिता देवानां विश्वाभि धाम.. (३) हे सोम! आप फैले हुए हैं. आप महान व समुद्र जैसे हैं. आप पिता (पालक) हैं. आप सभी देवताओं के धाम हैं. (३) पवस्व सोम महे दक्षायश्वो न निक्तो वाजी धनाय.. (४) हे सोम! घोड़े की तरह आप को परिष्कृत किया है. आप शक्ति की बढ़ोतरी करते हैं. आप बल व वैभव दीजिए. आप द्रोणकलश में भरे रहिए. (४) इन्दुः पविष्ट चारुर्मदायापामुपस्थे कविर्भगाय.. (५) हे सोम! आप कवि व सुंदर हैं. आप को भग देवता को प्रसन्न करने के लिए जल में मिलाया जाता है. (५) अनु हि त्वा सुत २४ सोम मदामसि महे समर्यराज्ये. वाजाँ अभि पवमान प्र गाहसे.. (६) हे सोम! रस निकालने के बाद हम आप का पूजापाठ करते हैं. आप को परिष्कृत करते हैं. आप राज्य की रक्षा कीजिए. आप दुश्मनों की सेना पर हमला करने के लिए प्रस्थान करते हैं. (६) क ईं व्यक्ता नरः सनीडा रुद्रस्य मर्या अथा स्वश्वाः.. (७) हे व्यक्त करने वाले मनुष्यो! हमें जानकारी देने की कृपा कीजिए कि एक ही आवास में रहने वाले अपने घोड़ों वाले मरुद्गणों के साथ रुद्र का क्या संबंध है. (७) अग्ने तमद्याश्वं न स्तोमैः क्रतुं न भद्र २४ हृदिस्पृशम् ऋध्यामा त ओहैः.. (८) हे अग्नि! आप घोड़ों के समान गतिमान हैं. हम ऊह स्तोत्र गा रहे हैं. यह ऊह स्तोत्र हृदय को स्पर्श करने वाला है. आप की यशगाथा की बढ़ोतरी करने वाला है. (८) आविर्मर्या आ वाजं वाजिनो अगमं देवस्य सवितुः सवम्. स्वर्गा अर्वन्तो जयत.. (९) सविता ने परिष्कृत सोमरस को ग्रहण कर लिया है. वे तेजस्वी व मनुष्य के लिए हितकारी हैं. यजमानों को उन से जीतने के लिए घोड़े और स्वर्ग की इच्छा करनी चाहिए. (९) पवस्व सोम द्युम्नी सुधारो महाँ अवीनामनुपूर्व्यः.. (१०) हे सोम! आप प्रकाशमान हैं. आप अच्छी धारा से द्रोणकलश में झरिए. आप अपूर्व व महान हैं. (१०) दसवां खंड विश्वतोदावन्विश्वतो न आ भर यं त्वा शविष्ठमीमहे.. (१) ebook converter DEMO Watermarks*