सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 97, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे यजमानो! आप वृत्र का नाश करने वाले इंद्र के लिए गाथाएं गाइए. आप ब्राह्मण के लिए जिन गाथाओं को गाएंगे, उन्हें वे प्रसन्न हो कर सुनते हैं. (१०) ग्यारहवां खंड अचेत्यग्निश्चिकितिर्हव्यवाट् न सुभद्रथः.. (१) हे अग्नि! आप हविवाहक, प्रकाशमान, ज्ञानवान हैं. जैसे रथ निर्धारित जगह ले जाता है, वैसे ही आप जिनजिन देवताओं के लिए जोजो वस्तु समर्पित की जाती है, उसे उनउन देवताओं तक पहुंचाते हैं. आप सर्वज्ञाता हैं. (१) अग्ने त्वं नो अन्तम उत त्राता शिवो भुवो वरूथ्यः.. (२) हे अग्नि! आप हमारे समीप हैं. आप रक्षक, कल्याणकारी, संरक्षक व उपासना के योग्य हैं. (२) भगो न चित्रो अग्निर्महोनां दधाति रत्नम्.. (३) हे अग्नि! आप महान व रत्न धारण करते हैं. आप सूर्य जैसे हैं और यजमानों को सौभाग्यवान बनाते हैं. (३) विश्वस्य प्र स्तोभ पुरो वा सन्यदिवेह नूनम्.. (४) हे अग्नि! आप सभी शत्रुओं के नाशक हैं. आप यज्ञवेदी पर निश्चित रूप से उपस्थित रहते हैं. (४) उषा अप स्वसृष्टमः सं वर्तयति वर्तनि २४ सुजातता.. (५) उषा अच्छी तरह प्रकट हो कर अपनी किरणों से अपनी बहन रात के अंधेरे को दूर करती है. वह अपना मार्ग प्रकाशित करती है. (५) इमा नु कं भुवना सीषधेमेन्द्रश्च विश्वे च देवाः.. (६) इंद्र और अन्य सभी देवों की मदद से ऋषिगण इस भुवन को अपने अनुशासन (वश) में रखते हैं. इस से संसार में सुख बना रहता है. (६) वि सुतयो यथा पथा इन्द्र त्वद्यन्तु रातयः.. (७) हे इंद्र! जैसे छोटे पथ राजपथ से मिल जाते हैं, वैसे ही आप की कृपा से सभी को धन की राह मिलती है. (७) अया वाजं देवहित २४ सनैम मदेम शतहिमाः सुवीराः.. (८) हमें देवहित प्राप्त हों. हमें अन्न व बल प्राप्त हो. हम शतायु हों. हम प्रसन्न रहें. हमें सुवीर (श्रेष्ठ वीर) संतान मिले. (८) ebook converter DEMO Watermarks*