भारतकोश
समयसार (प्राकृत गाथा एवं हिन्दी-अंग्रेजी व्याख्या)

समयसार (प्राकृत गाथा एवं हिन्दी-अंग्रेजी व्याख्या)

Samayasara of Acharya Kundakunda with Hindi Commentary

आचार्य कुन्दकुन्द / अमृतचन्द्र सूरि द्वारा

DevanagariHindipublished226 पृष्ठ

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अध्याय - 10 ज्ञानादि का घात होने पर पुद्गल का घात नहीं होता - णाणस्स दंसणस्स य भणिदो घादो तहा चरित्तस्स। ण वि तम्हि को वि पोग्गलदव्वे घादो दु णिद्दिट्ठो॥ (10-62-369) ज्ञान, दर्शन और चारित्र का घात बताया है, (किन्तु) उस पुद्गल द्रव्य में कोई घात नहीं कहा। Destruction of knowledge, faith, and conduct, has been mentioned; (but) destruction of physical matter has not been indicated. सम्यग्दृष्टि को विषयों में राग नहीं है - जीवस्स जे गुणा केई णत्थि ते खलु परसु दव्वेसु। तम्हा सम्मादिट्ठिस्स णत्थि रागो दु विसएसु॥ (10-63-370) जीव के जो कोई गुण हैं, वे वास्तव में परद्रव्यों में नहीं हैं; इसलिए सम्यग्दृष्टि को विषयों में राग नहीं है। The attributes of the soul do not exist in alien substances; therefore, the right believer has no attachment for the sense- objects. 174