समयसार (प्राकृत गाथा एवं हिन्दी-अंग्रेजी व्याख्या)
Samayasara of Acharya Kundakunda with Hindi Commentary
आचार्य कुन्दकुन्द / अमृतचन्द्र सूरि द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअध्याय - 10 जीव के रागादि परिणाम परद्रव्य में नहीं हैं - रागो दोसो मोहो जीवस्स दु ते अणण्णपरिणामा। एदेण कारणेण दु सद्दादिसु णत्थि रागादी॥ (10-64-371) राग, द्वेष, मोह वे जीव के अनन्य परिणाम हैं। इस कारण राग आदि (परिणाम) शब्द आदि में नहीं हैं। Attachment, aversion, and delusion, are the soul's own immutable modes; for this reason, sound (and other sense- objects) do not possess attachment etc. परद्रव्य जीव में रागादि उत्पन्न नही करता - अण्णदवियेण अण्णदवियस्स णो कीरदे गुणुप्पादो। तम्हा दु सव्वदव्वा उप्पज्जंते सहावेण॥ (10-65-372) अन्य द्रव्य के द्वारा अन्य द्रव्य के गुणों की उत्पत्ति नहीं की जा सकती; इसलिए (यही कारण है कि) सब द्रव्य अपने-अपने स्वभाव से उत्पन्न होते हैं। The qualities of a substance cannot be produced by another substance; therefore, all substances are produced by their own, individual nature. 175