भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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१०८श्रीसाम्बपुराणम्

पर्जन्यश्चैव पूषा च भारद्वाजः सगौतमः।
चित्रसेनश्च गन्धर्वस्तथा वसुरुचिश्चयः॥३३॥
विश्वाची च घृताची च उभे तु पुण्यलक्षणे।
नागस्त्वैरावतश्चैव विश्रुतश्च धनञ्जयः॥३४॥
सेनजिच्च सुषेणश्च सेनानी ग्रामणीश्च तौ।
आपो वातश्च द्वावेतौ यातुधानौ प्रकीर्तितौ॥३५॥
वसन्त्येते तु वै सूर्ये ईषोर्जौ कालपर्ययात्।

पर्जन्य तथा पूषा देवता, भारद्वाज तथा गौतम ऋषि, गन्धर्वगण, चित्रसेन, रुचि तथा चय नामक वसुद्वय, पुण्यलक्षणा विश्वाची तथा घृताची अप्सरा, नाग तथा ऐरावत, विश्रुत एवं धनञ्जय, सेनजित् सुषेण-सेनानी तथा ग्रामरक्षक, अप तथा वात—ये दो यातुधान। ये सभी कालक्रम से आश्विन एवं कार्तिक में सूर्य में निवास करते हैं॥३३-३५॥

हैमन्तिकौ तु द्वौ मासौ वसन्ति तु दिवाकरे॥३६॥
अंशो भागश्च द्वावेतौ कश्यपश्च क्रतुश्च तौ।
भुजङ्गश्च महापद्मः सर्पः कर्कोटकस्तथा॥३७॥
चित्राङ्गदश्च गन्धर्व ऊर्णायुश्चैव तावुभौ।
अप्सराः पूर्वचित्तिश्च गन्धर्वा चोर्वशी तथा॥३८॥
तार्क्ष्यश्चारिष्टनेमिश्च सेनानीर्ग्रामणीश्च तौ।
अवस्फूर्जश्च विद्युच्च यातुधानौ तु तौ स्मृतौ॥३९॥

अग्रहायण तथा पौष (हैमान्तिक) मास में ये दिवाकर में निवास करते हैं—अंश तथा भाग ये दो देवता, कश्यप तथा ऋतु ऋषि, भुजङ्ग महापद्म तथा कर्कोटक सर्प, चित्रांगद तथा ऊर्णायु गन्धर्व, पूर्वचित्ति तथा उर्वशी अप्सरा, तार्क्ष्य (गरुड़) तथा अरिष्टनेमि—दो सेनानी (ग्रामणी) एवं दो यातुधान—अवस्फूर्ज तथा विद्युत्॥३६-३९॥

सह चैव सहस्ये च वसन्त्येते दिवाकरे।
ततः शैशिरयश्चापि मासयोर्निवसन्ति वै॥४०॥
त्वष्टा विष्णुर्जमदग्निः विश्वामित्रस्तथैव च।
काद्रवेयौ तथा नागौ कम्बलाश्वतरावुभौ॥४१॥
गन्धर्वौ धृतराष्ट्रश्च सूर्यवर्चाश्च तावुभौ।
इत्येते निवसन्ति स्म द्वौ द्वौ मासौ दिवाकरे॥४२॥

माघ तथा फाल्गुन में ये सूर्य में अवस्थान करते हैं। तदनन्तर शीतकालीन मासद्वय में ये वास करते हैं—त्वष्टा एवं विष्णु देवता, जगदग्नि तथा विश्वामित्र ऋषि, काद्रवेय तथा कम्बलाश्वतर नाग, धृतराष्ट्र तथा सूर्य वर्चा गन्धर्व—ये सब दो-दो मास सूर्य में रहते हैं॥४०-४२॥

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