साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंप्रथमोऽध्यायः ३
पुराणमखिलं चात्र सर्वशास्त्रप्रतिष्ठितम्।
कथयस्व महाभाग यथावच्छ्रुतवानसि ॥१४॥
धीमान् साम्ब ने भास्कर से जिस पुराण की जिज्ञासा की थी, वह द्वादशाकार (विवस्वान्, अर्यमा, पूषा, त्वष्टा, सविता, भग, धाता, विधाता, वरुण, मित्र तथा उरुक्रम—यह द्वादश नामधारी सूर्य) अथवा पञ्चदश मूर्ति (तीस का आधा) से युक्त नहीं है। जिसमें समग्र पुराण तथा सर्वशास्त्र प्रतिष्ठित है, उसे मुझसे कहिये, जैसा कि आपने सुना था॥१३-१४॥
सूत उवाच
प्रश्नभारो महानेष यथा वदसि सुव्रत।
यन्महाभारताख्यानाद् बह्वर्थं श्रुतिविस्तरात् ॥१५॥
सूत कहते हैं—हे सुव्रत! आप जैसा कहते हैं, वह महत् विस्तृत प्रश्न है। यह विस्तार से श्रवण करने के योग्य है। यह महाभारत के आख्यान से भी अधिक अर्थयुक्त है॥१५॥
पुराणानां च सर्वेषां प्रवरः प्रश्न उत्तरः।
कथाश्च विविधाश्चित्राः पुराणाः सम्प्रतिष्ठिता ॥१६॥
समस्त पुराणों में श्रेष्ठ यह पुराण प्रश्नोत्तर तथा अनेक कथायुक्त है तथा अनेक प्रकार के विचित्र पुराण इसमें सम्प्रतिष्ठित हैं॥१६॥
वेदार्थस्मृतिसाराणि वर्णधर्माश्रयाणि च।
भूतं भव्यं भविष्यं च मन्त्रवादस्तथैव च ॥१७॥
इसमें वेदार्थ तथा स्मृति का सार है तथा वर्णाश्रम धर्म का आश्रय लिया गया है। अतीत-वर्त्तमान तथा भविष्यद् मन्त्रवाद भी इसमें समाहित हैं॥१७॥
वश्याकर्षणविद्वेषस्तम्भनोच्चाटनादिकम् ।
प्रतिमालक्षणञ्चैव पूजावासविधानकम् ॥१८॥
मण्डलानि क्रियायागाः सिद्धियागाश्च साधनम्।
महामण्डलयागाश्च सान्निध्यं द्वादशात्मनः ॥१९॥
भूमेर्वा तोषणं चैव पुष्पधूपविधिस्तथा।
सप्तमीकरणं चैव उपवासविधिस्तथा ॥२०॥
प्रोक्षणं यच्च दानस्य फलं यच्च प्रकीर्त्तितम्।
वेलाकालविधानञ्च यच्च धर्मविधिस्तथा ॥२१॥
धूपकर्मविधिश्चैव जयस्यापि तथा विधिः।
प्रयताप्रयतस्यैव तथा स्वप्नानुवर्णनम् ॥२२॥