भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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श्रीसाम्बपुराणम्

प्रायश्चित्तविधानञ्च तथाचार्यस्य लक्षणम्।
दीक्षां सर्वशिष्याणां मन्त्रेणापि विनिश्चयः ॥२३॥
स्तवाश्च विविधाश्चैवं यस्मिन् ग्रन्थे समासतः।
भविष्यन्ति यथान्यायमाधाय विविधाश्रयाः ॥२४॥

इति श्रीसाम्बपुराणे उद्देशानुक्रमणिकाकथनं नाम प्रथमोऽध्यायः


वशीकरण, आकर्षण, विद्वेषण, स्तम्भन, उच्चाटनादि एवं प्रतिमालक्षण, पूजागृह-विधान, मण्डल, क्रियायाग, सिद्धियाग साधन, महामण्डल याग एवं द्वादशात्मक सूर्य का सान्निध्य, भूमि का तोषण, पुष्प तथा धूपविधि, सप्तमी की विशेष पूजाविधि तथा उपवासविधि कही गयी है। प्रोक्षण (यज्ञार्थ मन्त्रों से शुद्ध किया गया मांसादि) तथा दान का फल भी कहा गया है। वेलाकाल विधान (जिस काल में जिस कार्य को करना होता है) एवं धर्मविधि भी वर्णित है। धूपदान की विधि, जय-प्राप्ति का विधान, संयम, असंयम तथा स्वप्न-वृत्तान्त (स्वप्न-दर्शन का शुभा शुभ फल) भी वर्णित है।

प्रायश्चित्त-विधान, आचार्य-लक्षण, सकल शिष्य-दीक्षा तथा किसके लिये कौन-सा मन्त्र उपयोगी है? इसका निश्चय किया गया है। ग्रन्थ में विविध स्तव भी संक्षेप में कहे गये हैं। यथायथ रूप से भी नाना विधि से विषय का सन्निवेश किया गया है (ऐसा यह साम्बपुराण है)॥१८-२४॥

श्री साम्बपुराण का उद्देशानुक्रमणिका-कथन नामक प्रथम अध्याय समाप्त