भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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द्वितीयोऽध्यायः

(आदित्यमहिमा)

सूत उवाच
वसिष्ठं स्वस्थमासीनं मुनिराजं बृहद्वलः।
रघुवंशोद्भवोऽपृच्छद् गुरुं निःश्रेयसं परम्॥१॥

सूत कहते हैं—रघुवंशोद्भूत राजा बृहद्वल आसन पर आसीन ऋषिश्रेष्ठ अपने गुरु वशिष्ठ से परम निःश्रेयस् की जिज्ञासा करते हैं॥१॥

भगवन् श्रोतुमिच्छामि परं ब्रह्म सनातनम्।
यस्मिन्न पुनरावृत्तिं प्राप्नुवन्ति मनीषिणः॥२॥

हे भगवन्! सनातन परब्रह्म की बात सुनने की इच्छा करता हूँ; जहाँ जाने पर मनीषीगण पुनः जन्मग्रहण नहीं करते॥२॥

गृहस्थो ब्रह्मचारी वा वानप्रस्थोऽथ भिक्षुकः।
य इच्छेन्मोक्षमास्थातुं देवतां कां यजेत्तु सः॥३॥

गृहस्थ, ब्रह्मचारी, वानप्रस्थ अथवा भिक्षुक (संन्यासी) इत्यादि को मोक्षाभिलाषी होने पर किस देवता की अर्चना करनी चाहिये?॥३॥

कुतो ह्यस्य ध्रुवः स्वर्गः कुतो निःश्रेयसं परम्।
स्वर्गतश्चैव किं कुर्याद् येन न च्यवते पुनः॥४॥
देवतानां हि को देवः पितृणामपि कः पिता।
यस्मात् परतरं नास्ति तस्मै ब्रूहि महामुने॥५॥

मोक्ष चाहने वालों का स्थिर स्वर्ग कहाँ है? परम मंगल कहाँ है? स्वर्ग जाने हेतु क्या करना चाहिये, जिससे कि वहाँ से पतन न हो। देवताओं का कौन देव है? पितृगणों का कौन पिता है, जिससे पर (श्रेष्ठ) कोई नहीं है, हे महामुने! वह मुझसे कहिये॥४-५॥

कुतः सृष्टमिदं ब्रह्मन् विश्वं स्थावरजङ्गमम्।
प्रलयश्च कमभ्येति तद्भवान् वक्तुमर्हसि॥६॥

हे ब्रह्मन्! कहाँ से यह स्थावर-जंगम विश्व सृष्ट हुआ है तथा प्रलय के समय किसका आश्रय लेकर स्थित रहता है? यह आप बतायें॥६॥

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